😊 इकरार 😊

😊 इकरार 😊

By | 2018-04-23T21:04:46+00:00 April 23rd, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

हमको तुमसे प्यार है ,

कब हमें इनकार है !

सच कहूँ तो तुमसे ही,

मेरी ज़िन्दगी गुलज़ार है।

 

प्यार का गुल खिला ,

मुझको मेरा हमदम मिला।

किसी से क्या गिला ,

खुशियों का बढ़ा सिलसिला।

 

लगता है तुम्हारे बिना ,

यह ज़िन्दगी बेज़ार है ।

हमको तुमसे प्यार है ,

कब हमें इनकार है !

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परास्नातक,संस्कृत, इ०वि०वि०।(लब्ध -स्वर्णपदक) डी०फिल०, संस्कृत विभाग, इ०वि०वि०।

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