बिड़ला हॉस्टल, पिलानी की रविवारीय प्रार्थना सभा

बिड़ला हॉस्टल, पिलानी की रविवारीय प्रार्थना सभा

हमारे वक्त (१९७५-१९७८) के दौरान  बिड़ला हॉस्टल, पिलानी में रविवार की प्रार्थना सभा सबको बहुत भाती थी जो मैस के ऊपर पहली मंजिल पर स्थित बड़े हॉल में माईक और साऊंड सिस्टम लगा कर बहुत व्यवस्थित तरीके से आयोजित की जाती थी। जिसका पूरा श्रेय मैं वार्डन श्रद्धेय शशिकांत शर्मा जी को देना चाहूँगा जो हिंदी विषय के अध्यापक होने के साथ-साथ हमारे चीफ वार्डन भी थे।
प्रत्येक सप्ताह किसी न किसी प्रबुद्ध हस्ती या संत महात्मा को हम सबसे संवाद के लिए आमंत्रित किया जाता था। मुझे याद है कि “दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अंखियाँ प्यासी रे” भज़न से प्रार्थना-सभा का समापन होता था, और मुझे यह भजन आज 36 वर्षों के लंबे अंतराल के बावजूद कंठस्थ याद है। एक और भजन है जो मुझे कंठस्थ याद है — “श्री राम चन्द्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणंम “.
अभी कुछ समय पहले अपने घर पर बच्चों के साथ फिल्म “स्लमडॉग मिलियनीयर” देखते वक्त जब यह भजन फिल्म के पात्र के साथ साथ मैं गाने लगा तो बच्चे आश्चर्य से पूछने लगे कि यह भजन मैंने कब सीखा। हकीकत बताने पर उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ !  

नरेन्द्र सोनी 24.07.2015

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सरकारी नौकरी में हूं एव समय मिलने पर तुकबंदी कर लेता हूं।

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