लगता है।

लगता है।

By | 2018-04-26T00:46:46+00:00 April 25th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |1 Comment

ग़ज़ल “मन पसन्द गजल :-

जो हमको सबाब लगता है।
आप को क्यूँ खराब लगता है।।

आप का चेहरा मेरी आँखों को।
एक लिक्खी किताब लगता है।।

उसके खामोश लबों को सुनिए।
ढेर सारा जबाब लगता है।।

मुस्कुराने का सबब क्या जानें।
मामला लाजवाब लगता है।।

उसने मुझसे हिसाब मांगा है।
जो मुझे बेहिसाब लगता है।।
– जयराम राय 

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One Comment

  1. Sanjay Saroj "Raj" April 28, 2018 at 11:05 am

    सुन्दर !!!

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