उलझन 2

उलझन 2

By | 2018-04-26T22:00:55+00:00 April 26th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

 

उलझन मुझे सुलझाने का ईनाम मिल गया।
उससे बड़ा उलझा हुआ अब काम मिल गया।।

मैं जा रहा था अपने घर शुकून के लिए।
अब क्या करूँ मैं रास्ते में जाम मिल गया।।

वो खुश था कि मैं खूब परेशान हूँ यहाँ।
मैं कैसे उससे कह दूँ कि आराम मिल गया।।

उसकी हमारी दोस्ती का ही कमाल है।
उसके किये का मुझको भी अंजाम मिल गया।।

कुछ लोगों को ये ऊँची बिरासत के बदौलत।
बैठे बिठाए कोई बड़ा नाम मिल गया।।
  – जयराम राय 

Comments

comments

Rating: 3.0/5. From 2 votes. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 6
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    6
    Shares

About the Author:

Leave A Comment