जीवन

जीवन

By | 2018-04-28T15:09:53+00:00 April 28th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

जीवन कहता जाय कहानी ,
कुछ अनजानी कुछ पहचानी।

रंग रंग के किरदारों से ,
आगे कथा बढ़ाए।
बस दम लेने को ठहरे फिर,
घटना चक्र घुमाए।
कभी लगे नूतन नव कोरी ,
लगती कभी पुरानी ।

जीवन कहता जाय कहानी ,
कुछ अनजानी कुछ पहचानी।

स्निग्ध स्वरों में बतलाये वह ,
नव  मधुमासी किस्से।
रुँधे हुये स्वर में बोले जब ,
हो दुखदायी हिस्से।
कथा चक्र जीवन का बहता ,
ज्यों घाटो पर पानी।

जीवन कहता जाय कहानी ,
कुछ अनजानी कुछ पहचानी।

जीवन की यह कथा श्रृंखला ,
कौन निरंतर लिखता ।
घटनाओं का ताना बाना ,
पल पल बुनता रहता ।
हर किरदार यही बस पूछे ,
क्या है उसकी निशानी ।

जीवन कहता जाय कहानी ,
कुछ अनजानी कुछ पहचानी।

किरदारो का लिखा हुआ ही ,
जीवन पढ़ता जाये  ।
कथाकार को कथा उसी की,
जीवन रोज सुनाये ।
तेरी तुझसे ही कहता वह ,
अपनी मगर जुबानी ।

जीवन कहता जाय कहानी ,
कुछ अनजानी कुछ पहचानी।

—राकेश सुमन

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