जीवन – जाच ( तिंन )

जीवन – जाच ( तिंन )

By | 2018-05-05T23:22:47+00:00 May 5th, 2018|Categories: कविता|0 Comments

* मेरी मातृभाषा पंजाबी व राष्ट्रभाषा हिन्दी है ; मैं दोनों भाषाओं में लिखता हूँ । प्रस्तुत कविता पंजाबी भाषा और देवनागरी लिपि में है ।*

* * * * *
जीवन – जाच
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( तिंन )

ओ सच धरम दे पांधिओ
कंन धर के सुण लओ उसदी
जेहड़ा डिठ्ठी राह दिखावे
सिद्धा पद्धरा रब दा बंदा
कोई वहम भरम न पावे
न कोई नच्चे नाच अनोखा
न दूजे नूँ नाच नचावे
जो कुज्झ दित्ता रब ने उसनूँ
भोरा – भोरा सब दी तली टिकावे
न थक्के ओह वंडदा चूरी
न दे के फिर पछतावे
ज़ात दा कच्छप नहींओं दिसदा
दिस्से तां अंदर नूँ वड़ जावे
कथा कहां मैं अक्खीं देखी
जे तेरे मन भावे
देख देख मैं देखया
नहीं देखदे मिट्टी दे बावे . . . . .

करम जे होवण बहुत कसूते
सुत्तयां सराह्णे कुत्ता मूते
धन – दौलत नूँ फूकणै
छड्ड चल्ले पुत्त कपूते
नहीं देखदे मिट्टी दे बावे . . . . . !

वेदप्रकाश लाम्बा ९४६६०-१७३१२

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