भूख

भूख

By | 2018-05-07T00:39:18+00:00 May 7th, 2018|Categories: लघुकथा|Tags: , , |0 Comments

भूख तो सबको लगती है मगर वो भूख जो खाना खा के तृप्त हो जाये उस भूख और जो खाना ना मिल पाए उस भूख में बहुत अंतर है
भूख हो और खाना न हो कितनी कष्ट दायी परिस्थिति हो
मुझे आज भी ऐसा लगता है जैसे अभी अभी वो दृश्य देखा हो जबकि कई वर्ष बीत गए
एक हॉस्पिटल में बाहर पार्क में बैठा एक व्यक्ति पोटली खोल के रोटी गिन रहा था वो किसी और शहर का था मुझे उसको रोटी गिनता देख बहुत दुःख हुआ और एक अहसास भी की वो शायद ये देख रहा था की ये रोटियां कितने दिन चलेगी इस घटना से मेरे दिल और दिमाग पर बहुत गहरा धका लगा की पैसे की तंगी और हालत ने उसको खाना भी गिन गिन कर खाने को मजबूर किया क्युकी आज तो कही पानी भी बिना पैसे के नहीं मिलता ।काश में ऐसे हर इंसान की मदत कर पाऊ ।मै दुआ करती हु कोई भूखा न रहे और सबसे गुज़ारिश करती हु की खाने को बर्बाद न करे उनलोगो से पूछे जिनको खाने की कमी के कारण भूखा रहना पड़ता है अगर खाना बचता है तो किसी जरुरत मंद को दे या किसी जानवर को खिला दे खाना कूड़े के डबे में डाल कर अन्न का अनादर न करे
धन्यवाद्
शालिनी जैन

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