कामयाबी।

कामयाबी।

अपनी मन पसन्द गजल :-

पढ़ने में कुछ भी खराबी नहीं है।
मगर इल्म केवल किताबी नहीं है।।

भले जोड़ना और घटाना न आये।
कोई आदमी बेहिसाबी नहीं है।।

कई जंग ऐसे भी हम लड़ रहे हैं।
जिन्हें जीतना कामयाबी नहीं है।।

बिपरीत हैं गर दशा और दिशाऐं।
तो ऐसे में रस्ता जबाबी नही है।।

दौलत और शोहरत के भी नशे हैं।
इनके नशेड़ी शराबी नहीं है।।
– जयराम राय

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  1. SUBODH PATEL May 13, 2018 at 11:42 am

    बहुत सही

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