शिकवा

शिकवा

By | 2018-05-10T22:36:20+00:00 May 10th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

हमें ही हौसला नहीं होता।
वर्ना दुनियां में क्या नहीं होता।।

जब से दिल टूट गया है मेरा।
कोई शिकवा गिला नहीं होता।।

साथ अब छूट गया है उनसे।
काम पूरा मेरा नहीं होता।।

छोड़ दो उन तमाम लोगों को।
जिनसे कोई भला नहीं होता।।

देवता होगा वो इन्सान नहीं।
जिससे कोई खता नहीं होता।।

कहीं कहीं तो सिर्फ पैसे से।
कर्ज सारा अदा नहीं होता।।

दिल के साथ चैन लेता गया।
फिर भी, मैं खफा नहीं होता।।

जान तक दे दिया है उनके लिए।
फिर भी बावफा नहीं होता।।

– जयराम राय 

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