यक्षप्रश्न

यक्षप्रश्न

By | 2018-05-10T21:39:59+00:00 May 10th, 2018|Categories: लघुकथा|Tags: , , |0 Comments

मुझे समझ नही आ रहा था कि मैं क्या प्रतिक्रिया दूं।घटना कुछ ऐसी घटी कि मन विचारों के भंवर मे फंस गया।पार्क में टहलते टहलते दो सखियों का वार्तालाप सुनाई दिया।सच बहन बहुत अच्छा जीवन कट रहा है भगवान का शुक्र है हम दोनो की पैंशन आ जाती है।दो बेटियां हैं उनके तीज-त्यौहार आराम से मान-इज्जत के साथ निपटाती हूं।भगवान की दया से गुजारा बहुत बढिया हो रहा है।बेटा भी अपना अच्छा सैट है।बहु भी नौकरी करती है।धन्यवाद है परमात्मा का।कमला की बात सुन कर दयावती ने कहा किस्मत वाली हो बहन।अचछा अपनी बहु के मां-बाप क्या करते हैं सुना हे अच्छी शादी की थी।बेटे की शादी की धूम-धाम याद है मुझे।कमला लम्बी सांस लेकर बोली बस बहन शादी ही धूम-धाम से की,अब नही आता कुछ भी बहु का,मैं तो अपनी बेटियों का घर भर देती हूं पर बहु कुछ नही लाती।भुक्कड हैं उसके मायके वाले।अब कमला और दय की बातें हथौडे की तरह चोट कर रही थी।दिमाग में बंवडर मच गया।लेखन का शौक होने के कारण एक मार्मिक और शोचनीय प्लाट कहानी का मिल गया।कई प्रश्न उदय हो गये जांच की तो पाया बहु के मायके वालो ने भी भरपूर यथा-शक्ति दान-दहेज और तीज-त्यौहार निभाए थे।यह लघु कथा कब समाप्त होगी यक्षप्रश्न है?

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