बुजुर्गों की दुआएँ।

बुजुर्गों की दुआएँ।

By | 2018-05-14T10:16:26+00:00 May 14th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

तरही गजल :-बुजुर्गों की दुआ….

अगर चेहरा खिला है और मैं हूँ।
बुजुर्गों की दुआ है और मैं हूँ।।

मुहब्बत में मुझे अक्सर लगा है।
सभी मेरी खता है और मैं हूँ।।

जबसे सच्चाईयों के साथ हूँ मैं।
सभी झूठे खफा हैं और मैं हूँ।।

मेरी ये कामयाबी की कहानी।
बड़ा सा हौसला है और मैं हूँ।।

ये जो दंगा हुआ निर्दोष था मैं।
मेरा घर क्यूँ जला है और मैं हूँ ।।

मेरे रहबर मेरी जानिब तो देखो।
सफर मेरा बुरा है और मैं हूँ।।
**जयराम राय **

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