होस्टल वार्डन — मां बाप दोनों

होस्टल वार्डन — मां बाप दोनों

By | 2018-05-16T21:18:40+00:00 May 16th, 2018|Categories: संस्मरण|Tags: , , |0 Comments

मैं अपने बिड़ला- स्कूल के साथियों के साथ पूरे तीन वर्षों तक (1975-78) श्रद्धेय शशीकांत सर की देख-रेख में रहा. वे एक सख्त प्रशासक थे जो तब 10 से 13 वर्ष की अवस्था में बहुत खलता था. लेकिन आज सब यह मानतें हैं कि हम सबकी सफलता के पीछे शशीकांत सर का बहुत बड़ा योगदान है. उम्र के उस नाजुक दौर में उन्होंने हमारे व्यक्तित्व को बाहर से सख्त एवं अंदर से बहुत नर्म सहारा देकर संवारा.

बिड़ला हॉस्टल के दिनों में उन्होंने हमारे माँ और पिता दोनों की भूमिका बखूबी निभाई. मैस में अच्छा भोजन, स्टडी-अॉवर्स में जरूरी पढ़ाई, रविवार की प्रार्थना-सभा और रविवार शाम को बिट्स अॉडी में मूवी — सब उनके प्रयासों से संभव होता था.

आज जीवन में हम सब जिस भी मुकाम पर हैं, उसमें श्रद्धेय शशीकांत सर का बहुत बड़ा योगदान है.
बिड़ला-स्कूल की २०११ में आयोजित हुई पहली एलुमनाई मीट उनकी हौंसला अफज़ाई और मार्गदर्शन से ही संभव हो पाई एवं उसके बाद दूसरी तथा तीसरी मीट में भी वे शामिल हुए और पग-पग पर हमारा पथ-प्रदर्शन किया.

वे हमेशा हमारे बीच रहेंगे अपने वक्तव्यों के जरिए, अपने अथाह प्रेम के जरिए और उन सुनहरी यादों के जरिए जो उन्होंने हमारी स्कूल टाईम की सैंकड़ों फोटोग्राफ्स और कमेंट्स के माध्यम से हम सबके साथ सांझा की.

प्रभु ईश्वर से करबद्ध प्रार्थना है कि वे महान आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें ! 🙁

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सरकारी नौकरी में हूं एव समय मिलने पर तुकबंदी कर लेता हूं।

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