राहबर।

राहबर।

By | 2018-05-16T21:17:24+00:00 May 16th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

ठोकरों की मार उसपर बेरूखाई देख ली।
रास्ते में रहबरों की रहनुमाई देख ली।।

मुझको उसका साथ काँटों की तरह चुभने लगा।
दोस्त बनकर दोस्ती कैसी निभाई देख ली।।

अपनी उम्मीदों पे कुछ ऐसा भरोसा हो गया।
हमने उनकी बेवफाई में वफाई देख ली।।

अपनी मुश्किल ले के हम दर दर भटकते रह गये।
फिर जमाने के खुदाओं की खुदाई देख ली।।

रोज जिसको पास देखा है उसी की आज हम।
आंसुओं को आँख में भरकर जुदाई देख ली।।

इश्क में रोने और् हँसने की कहानी क्या कहें।
बस यही कि हमने करके आशनाई देख ली।।

 – जयराम राय 

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