आदमी होने के नाते

आदमी होने के नाते

By | 2018-05-16T21:04:16+00:00 May 16th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

मैं बियाबान में भी

लेकर चलता हूँ

अपना परिवार

गाँव अपना

शहर और देश के साथ ही

दुनिया अपनी

आदमी होने के नाते।

और तुम भीड़ में भी

अपने में सिमटकर

तोड़ते हो परिवार

उजाड़ते हो गाँव

जलाते हो शहर और देश

किसी और दुनिया के लिए

आदमी होने के नाते।

मैं हार जाता हूँ

अकेले होने के कारण

तुम बाजी मार जाते हो

पूरी तरह तैयार होने के कारण

हथियारों के साथ।

तब समझ में आता कि

बड़ा कमजोर है आदमी

अपने द्वारा निर्मित हथियारों से भी

आदमी होने के कारण।

या कि तुम आदमी हो ही नहीं?

जानवर हो सर्कस के

इशारे पर करतब दिखाने वाला जानवर!

जिसकी अपनी तो कोई सोच ही नहीं

जिसका आदमी मर गया है

या कि डर गया है ,

और मैं डरा रहा हूँ

आदमी होने के नाते।

¨¨

Comments

comments

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 3
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    3
    Shares

About the Author:

तमकुही रोड (सेवरही), कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) के स्थायी निवासी केशव मोहन पाण्डेय ने एम.ए.(हिंदी), बी. एड. किया है। भोजपुरी में उनकी ‘कठकरेज’ (कहानी संग्रह) तथा मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली से ‘जिनगी रोटी ना हऽ’ (कविता संग्रह) प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने साझा काव्य संग्रह ‘पंच पल्लव’ व 'पंच पर्णिका' का संपादन भी किया है। 'सम्भवामि युगे युगे' लेख-संग्रह प्रकाशित। वे वर्ण-पिरामिड का साझा-संग्रह ‘अथ से इति-वर्ण स्तंभ’ तथा ‘शत हाइकुकार’ हाइकु साझा संग्रह में आ चुके हैं। साहित्यकार श्री रक्षित दवे द्वारा अनुदित इनकी अट्ठाइस कविताओं को ‘वारंवार खोजूं छुं’ नाम से ‘प्रतिलिपि डाॅट काॅम’ पर ई-बुक भी है। आकाशवाणी और कई टी.वी. चैनलों से निरंतर काव्य-कथा पाठ प्रसारित होते रहने के साथ ही ये अपने गृहनगर में साहित्यिक संस्था ‘संवाद’ का संयोजन करते रहे हैं। इन्होंने हिंदी टेली फिल्म ‘औलाद, लघु फिल्म ‘लास्ट ईयर’ और भोजपुरी फिल्म ‘कब आई डोलिया कहार’ के लिए पटकथा-संवाद और गीत लिखा है। ये अबतक लगभग तीन दर्जन नाटकों-लघुनाटकों का लेखन और निर्देशन कर चुके हैं। वर्तमान में कई पत्रिकाओं के संपादक मंडल से जुड़े हुए

Leave A Comment