बदमाश मंकी

बदमाश मंकी

मंकी फॉरेस्ट में दो बन्दर रहते थे- जॉनी और रॉनी | दोनों में गहरी दोस्ती थी, पर दोनों एक दूसरे के अपोजिट थे | जॉनी बहुत ही शरीफ़ और ईमानदार था तो रॉनी उसके विपरीत बहुत ही बदमाश और झूठा था |उसने शायद ही अपनी जिन्दगी मे कभी सच बोला हो | फेंकने मे तो वह आगे था ही, साथ ही उसकी एक और भी खराब आदत थी जो जॉनी को बिल्कुल भी पसंद नहीं थी | रॉनी जब कभी भी कुछ खाने कि चीज़ खरीदता तो खुद तो पूरा डकार जाता पर जॉनी को सिर्फ़ थोड़ा सा तोड़ कर दे देता | इतना ही नहीं अगर वह 5 रुपये के पकौड़े खरीदता तो जॉनी को सिर्फ दो पकौड़े पकड़ाता और खुद पूरा गटक जाता | यहां तक तो जॉनी को कोई ख़ास प्रॉब्लम नहीं थी पर उसकी एक और आदत इससे भी खराब थी | अगर कभी रॉनी चार समोसे खरीदता तो उसे सिर्फ़ एक समोसा दे कर खाना शुरू कर देता | फिर बीच में जूठे हाथ से ही जॉनी को समोसे दे कर कहता – “ले एक और खा”| उसे पता था कि जॉनी मेरा जूठा नहीं खाएगा |और कभी – कभी तो जॉनी को देने के डर से पहले ही मुंह लगा कर खाने की चीजें झूठा कर देता और दिखावे के लिये पूछता खाएगा जॉनी |

पर जॉनी ऐसा बिल्कुल भी नहीं था| वह कुछ भी खाने की चीजें खरीदता तो आधा ख़ुद खाता तो आधा रॉनी को देता | उसका कहना था – “ना मै किसी का जूठा खाता हूं और किसी को अपना जूठा खिलाता हूं |” कपट उसके अन्दर था ही नहीं और स्वभाव से भी वह हद से ज्यादा शरीफ़ था | इसीलिए लोग उसकी शराफ़त का फायदा उठाते थे और इस मामले में रॉनी कुछ ज्यादा ही एडवांस था | पर आखिर में रॉनी की आदत से परेशान होकर जॉनी ने उसे सबक सिखाने की ठानी | आखिर ऐसे बर्ताव से किसी को भी बुरा लगना लाजिमी है |

एक दिन की बात है | शाम का वक़्त था | ठंडी – ठंडी हवा चल रही थी | दोपहर को तेज़ आंधी के बाद घनघोर बारिश हुई थी, इसलिए शाम के वक्त मौसम काफी सुहावना हो गया था | मौसम का आनंद लेने के लिए रॉनी अपने घर के मेन गेट पर ही खड़ा थ कि उसे पास से जॉनी गुजरता हुआ दिखाई पड़ा |

“यार जॉनी, आज तो मौसम बहुत ही अच्छा है | जेब में पैसे भी नहीं है कि तुम्हें कुछ खिलाता | ऐसे मौसम में गरमा – गरम पकौड़े खाने का मज़ा ही कुछ और है |” , जॉनी को देखते ही रॉनी बोल पडा |

जॉनी को इसी मौके की ही तो तलाश थी | उसे पता था रॉनी को जब भी उससे खर्चे करवाने का मन होता है, वो यही बता कहता है | उसने उसे सबक सिखाने का पक्का इरादा कर लिया |

“हाँ यार, चल चौक पर से कुछ खा कर आते हैं |”, जॉनी ने जवाब दिया |

रॉनी तो कब से एक पैर उठा कर खड़ा था | तुरंत जॉनी के साथ चल पड़ा |

दोनों एक चाय की दुकान पर पहुंचे | वहां गरमा – गरम पकौड़े और समोसे देख कर तो रॉनी के मुँह में पानी आ गया |

जॉनी ने वहां से चार समोसे खरीदे | एक समोसा उसने रॉनी को दिया और बाकी खुद खाने लगा | रॉनी को बुरा तो लगा पर उसने कुछ कहा नहीं | चुपचाप समोसा खाता रहा | जब वह समोसा खा चुका तब जॉनी ने एक समोसा और देते हुए कहा, “ले रॉनी, एक और ले”| रॉनी ने देखा कि जॉनी उसे जूठे हाथ से ही दूसरा समोसा दे रहा है | तुरंत उसने बहाना कर दिया, ” यार जॉनी, आज मेरा पेट कुछ ठीक नहीं लग रहा | ज्यादा नहीं खा सकता |”

जॉनी समझ तो गया कि ये झूठ बोल रहा है पर उसने ज्यादा खुशामद नहीं की और उसके सामने ही तीनो समोसे खा गया | फिर उसने पाँच रुपए के पकौड़े खरीदे | रॉनी की तरह ही उसने दो पकौड़े उसे पकड़ाए और बाकी खुद खाने लगा | रॉनी को उसकी इस हरकत से बहुत बुरा लगा पर उसने कुछ कहा नहीं | फिर जॉनी ने खाते – खाते ही जूठे हाथ से कुछ पकौड़े रॉनी को देते हुए बोला, “ले, कुछ पकौड़े और ले | ऐसे मौसम में पकौड़े खाने का मज़ा ही कुछ और है |”

रॉनी ने पकौड़े लेने से मना कर दिया | जॉनी की इस हरकत से उसे बहुत चोट पहुंची थी | पर जॉनी ने उस पर ध्यान ना दे कर सारे के सारे पकौड़े डकार गया |

इस घटना के बाद कुछ दिनों तक जॉनी और रॉनी में मुलाकात नहीं हो पायी | 2-3 दिन बाद रॉनी ने अपने एक मित्र को जॉनी की ये हरकत सुनायी | उसका मित्र भी रॉनी को भली – भांति जानता था | उसने रॉनी को समझाया, “देख रॉनी, आज तेरे साथ किसी ने ऐसा किया तो तुझे बुरा लगा, पर तू तो सबके साथ ऐसा करता है | औरो को भी उतना ही बुरा लगता है जितना तुझे लगा | तूने मेरे साथ भी बहुत बार ऐसा किया है | मै भी चाहता था कि तुझे भी इस बात का एहसास हो, अपनी गलती का एहसास हो |” इतना कह कर वह चला गया |

पीछे अपने मित्र को जाता देख रॉनी यही सोच रहा था सच मे गलती मेरी ही है| उसने मन ही मन कसम खाई कि आज के बाद वो ऐसा कभी किसी के साथ नहीं करेगा | वो चुपचाप खड़ा था और उसकी आँखों में आँसू थे | इस दिन के बाद से रॉनी ने अपनी सारी गलत हरकत छोड़ दी और एक गुड मंकी बन गया |

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