देखा है

देखा है

By | 2018-05-21T22:24:31+00:00 May 21st, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

मैंने ख्वाबों का एक ऐसा जहांँन देखा है।
जैसे बंजारे ने अपना मकान देखा है।।

घरों में जिनकी जरूरत कभी नहीं होती।
लोग रखते हैं कुछ ऐसे सामान देखा है।।

जो जिन्दगी की दशा और दिशा बदलते हैं।
आजमा करके ऐसे इम्तिहान देखा है।।

बड़ी मुश्किल से कुछ ऐसे भी लोग मिलते हैं।
ईमान के लिए देते हैं जान देखा है।।

जो लोग खून पसीना बहाया करते हैं।
गैर के हाथ में उनकी कमान देखा है।।

जो दूसरों के ही कीमत पे जीते रहते हैं।
उनके हाथों पे लहू का निशान देखा है।।

किसी उलझन के अगर हम शिकार होते हैं।
धुँआ धुँआ सा जैसा आसमान देखा है।।

ऐसी बातें कि जो बिल्कुल हजम नहीं होती।
तमाम लोगों का झूठा बयान देखा है।।
– जयराम राय

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