याद आ गया

याद आ गया

By | 2018-05-21T21:50:43+00:00 May 21st, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

एक दिन वो मिली
वही पुरानी गली
दिल पे ये हाथ था
बच्चा उसके साथ था
स्माइल उसने जो किया
आगे था मैं बढ़ गया
चक्कर में पड़ गया
कि Hi बोलूं, यां नमस्ते प्रिया
मैं भी जवाँ था कहाँ
फिर भी style से जरा
अपने बालों में मैंने
हाथ था घुमा दिया
बोली हँसते हुए
बेटा! मामू है ये
साथ पढ़ते थे हम।
बहुत झगड़ते थे हम
कशमकश में पड़ गया
कि प्यार वो अब था कहाँ?
चालाक बार वो बनी
भोंदू फिर मैं बन गया
आँखें चुराते हुए
थोड़ा हिचकचाते हुए
बोली अच्छा चलूँ
कह इशारा था किया
उधर चिंटू के पापा ने
भी wave था कर दिया
सुन्न खड़ा था वहां
तितली फिर थी उड़ गई
बात कुछ न हुई
फिर भी गुदगुदी सी हुई
साइकिल stand से हटा
मैं भी घर को बढ़ा
कुछ गुनगुनाते हुए
कि बोलो क्या???
याद आ गया
वो गुजरा ज़माना
वो गुफ्तगू धीमी-धीमी
वो प्यार का नज़राना

– मुक्ता शर्मा

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About the Author:

सरकारी स्कूल में हिन्दी अध्यापक के पद पर कार्यरत,कालेज के समय से विचारों को संगठित कर प्रस्तुत करने की कोशिश में जुटी हुई , एक तुच्छ सी कवयित्री,हिन्दी भाषा की सेवा मे योगदान देने की कोशिश करती हुई ।

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