ये जिन्दगी

ये जिन्दगी

By | 2018-05-28T21:15:27+00:00 May 26th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

ये जिन्दगी हे,
बस यूं ही कटती चली जायेगी,
क्या होगा इसका
ये नहीं कोई बता पायेगा,
कोई हंसते, कोई रोते तो
कोई रूलाकर छोड जायेगा,

बीत गया इसका पल वो सुहाना
नही था जब इसका कोई पैमाना,
हुडदंग,अल्हड,मोज-मस्ती
का वो जमाना,
तिल-तिल याद करती हे ये जिन्दगी,
पर लौटकर नही आयेगा
वो बचपन सुहाना,

पल-पल ये ठोकरे खायेगी
कभी संभलेगी फिर बढेगी
कभी टुटकर खाकर चक्कर
ये धडाम से गीर जीयेगी,
फिर भी नहीं रूकेगी ये
कछुआ चाल से ही
पर चलती चली ये जायेगी

कभी अपनो मे खुशिया ये खोजेगी
तो कभी अपनो पर लगे नकाब हटायेगी,
लायेगी झुठी मुस्कान ये होठो पर
तो कभी आंसु दिल से बहायेगी,
करके विश्वास ये इन्सानो पर
अक्सर ये जख्म दिल पर खायेगी,
दुख और संताप की मारी ये जिन्दगी
बेटी,बहु,नाती और पोते मे खुशिया पायेगी,

लटक जायेंगे जब पैर कब्र मे
कमर भी धनुष सी मुड जीयेगी,
देख आईने मे खुद को
ये संतोष सी बतलायेगी,
तभी अचानक कुछ अभिलाषाये
झट से छलक जायेगी
जिन्दगी हे ये साहब
बस ऐसी ही चलती चली जायेगी…

#Deepak_UD

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