नासाज दिल

नासाज दिल

By | 2018-05-25T23:15:52+00:00 May 25th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

दिल आज नासाज हे,
नासमझ कुछ मिजाज हे,
दर्द इश्क का नही फिर भी उदास हे,
ख्वाईशो की लंबी फेहरिस्त के बोझ मे,
गुमसुम हे, अंजान हे, परेशान हे..

करना चाहता हे बाते खुलकर,
पर लगता हर चेहरा नकाबवान हे,
सहमा सा हे दिल डर हो रह बलवान हे,
चाहता हे आस्मा मे उडना,
पर आस्मा मे नही कोई मुकाम हे,

बेढंग सा रहा ये हे दिल,
भावनायें भी इसकी बेजान हे,
हे दर्द का विशाल सागर अंदर,
पर ये बन मूर्ति महान हे,
हो नहीं ये किसी का देखो
समय भी कितना चलायमान हे,

तक रहा राह पता नहीं किसकी,
नहीं आने वाला कोई मेहमान हे,
रह रहा हे अपनो के बीच,
फिर भी कही गुमनाम हे,
पता नही क्यो दिल आज नासाज हे…

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