गरीबी एक अभिशाप।

गरीबी एक अभिशाप।

By | 2018-05-25T23:42:20+00:00 May 25th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , |0 Comments

चित्र लेखन
23-05-2018
विधा-गजल:-

तुम अपने को धनवान भी रहने दिये होते।
गरीबों को तुम इन्सान भी रहने दिये होते।।

शहरों की जो रौनक है बराबर बनी रहे।
जंगल कहीं सुनसान भी रहने दिये होते।।

लिखने के लिए हर कोई आजाद है मगर।
लेखन में एक उनवान भी रहने दिये होते।।

इस जिन्दगी को जीने की एक राह चाहिए।
दिल में कोई अरमान भी रहने दिये होते।।

हम तो हैं परेशान ब्यवस्था की मार से।
जो शख्त थे फरमान भी रहने दिये होते।।

दुश्मन तुम्हारे जब से खतरनाक हो गए।
दरवाजे पे दरवान भी रहने दिये होते ।।

छल छद्म से सत्ता को हड़पने में लगे हैं।
सियासत में कुछ ईमान भी रहने दिये होते।।
**जयराम राय **

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