मेरी खता

मेरी खता

By | 2018-05-28T21:18:31+00:00 May 28th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , |0 Comments

मेरी खता
अचानक वो सामने जो आए

मैं यूँ ही थम सा गया

धड़कने बढ़ती गई दिल मचलता गया

कुछ पल जड़वत बुत स मैं खड़ा रहा

बातों बातों में इशारों इशारों में सब वो कह गए

दौर ये वफ़ा का जो था हसरतें बाँकी रहीं

चाहते बढ़ती गई आंखें तरसती रही

वो अपने अरमानों का मशविरा करते रहे

मैं खामोश सुनता रहा

होश में आ पाया जबतलक देर हो चुकी थी

वो सामने से मेरे जा चुके थे

काश वो हमारी स्थिति को जो समझ पाते

कुछ पल को ठहर जाते

खफा होना उनका लाजमी था

गिला हमको रहेगा वो मिलके भी मिले नहीं

चाहतों का सफर यूँ ही चलता रहेगा

जब तक हैं सांसे ये दिल धड़कता रहेगा

यादों में उनकी रह रह के मचलता रहेगा

हरपल यूँ ही आहें भरता रहेगा

हर घड़ी सोचता हूँ कि

हमारी खता थी जो वो खफा हो गए

लौट आओ फिर से ज़िन्दगी में

यूँ सजा मत दो हमें

अचानक सामने जो आए तुम

मैं थम सा गया

जो डूबा ख़यालों के समुंदर में

बस इतनी सी खता थी मेरी

हाँ ये खता है मेरी…….

 

सुबोध उर्फ सुभाष

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