तमन्ना का इक घर

तमन्ना का इक घर

 

। । ओ३म् । ।

* * * तमन्ना का इक घर * * *

बहारें जवाँ हैं
सितारे चमकते
रौशन हैं राहें
फूल महकते
ख़्वाबों की दुनिया
अरमान बहकते

मेरा दिल पुकारे
यह सब नज़ारे
तेरे लिए हैं
तेरे लिए

तेरे लिए हैं . . . . .

गीत प्रेम के
मिलन के तराने
पिछले जनम के
जाने पहचाने
आ जा तू आ जा
किसी भी बहाने

सेज सजी है रुत मस्तानी
अनछुई छुई मुई एक कहानी
तेरे लिए हैं
तेरे लिए

तेरे लिए हैं . . . . .

रिवाज़ों के बंधन
तोड़ के आ जा
रिश्ते जो चुभते
छोड़ के आ जा
दर्द पुराने वो अफसाने
मुँह मोड़ के आ जा

अधखिली कलियाँ
नई – नई गलियाँ
तेरे लिए हैं
तेरे लिए

तेरे लिए हैं . . . . .

चाँद का टुकड़ा
आवारा बादल
सूरज सिर पे
रस्ते घायल
रात परी की
टूटी पायल

तूफाँ के इशारे
समंदर किनारे
मेरे लिए हैं
मेरे लिए

मेरे लिए हैं . . . . .

जीवन के अंगना
जवानी का बूटा
तमन्ना का इक घर
मगर टूटा – फूटा
राहों का साथी
बातों का झूठा

दिन – रात के फेरे
सवालों के घेरे
यह किस लिए हैं
यह किस लिए

यह किस लिए हैं . . . . . !

वेदप्रकाश लाम्बा ९४६६०-१७३१२

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