अपनों के जख्म

अपनों के जख्म

By | 2018-06-12T05:58:37+00:00 June 12th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

हमारे जख्म दिल पर हैं दिखाये जा नहीं सकते।
मिले हैं वो भी अपनों से बताये जा नहीं सकते।।

कोई तो बात है जो आसमाँ नाराज है हमसे।
वर्ना बरसात में ओले गिराये जा नहीं सकते।

चमन में फूल और काँटो का माना साथ होता है।
हिफाजत के लिए काँटे हटाये जा नहीं सकते।।

किनारे और धारे भी नदी के साथ रहते हैं।
मगर रफ्तार दोनों के मिलाये जा नहीं सकते।।

सफर में गिर गये हैं तो उठाये जा भी सकते हैं।
नजर से गिर गये हैं तो बचाये जा नहीं सकते।

चिरागों को अगर दिल से जलाया है तो जलने दो।
कोई आँधी हो या तुफां बुझाये जा नहीं सकते।।

-जयराम राय

Comments

comments

No votes yet.
Please wait...
Spread the love
  • 2
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  • 1
  •  
  •  
  •  
    3
    Shares

About the Author:

Leave A Comment