प्यारी निशा

प्यारी निशा

By | 2018-06-09T21:23:10+00:00 June 9th, 2018|Categories: कविता|Tags: , |0 Comments

।।प्यारी निशा।।
गाड़ी रुकने का शोर हुआ।
मन व्याकुल उस ओर हुआ।
दरवाजा खुला और
उतरी निशा !!
मन में कौतूहल सा हुआ।
तभी डाक्टर साहिबा ने हाथ हिला।
सुबह का अभिवादन था किया।
हमने भी मुस्कान बिखेरी
कोशिश उनकी पर
मन हर्षित हुआ।
निशा के सिर पर हाथ फिरा।
हमने उसकी किस्मत पर
गर्व किया।
तभी गाड़ी मुड़ी और
संदेश मिला ।
शाम को भी आऊंगी
मेरी प्यारी निशा !!
चलो जैसे-तैसे समय हुआ।
आठवीं का पेपर खत्म हुआ।
आई गाड़ी ! पर कहाँ थी निशा ?
बच्चों से ढुंढ़वाया
खुद पड़ताल किया।
धूल उड़ाती गाड़ी उड़ी।
गाँव के कोने तक भी मुड़ी।
पता लगने पर मन
उल्लसित हुआ ।
हे रब! सीमा,रजनी
का भी भाग्य खिला।
हुई सुबह फिर दिखी निशा ।
बाजू पकड़ एतराज़ किया।
बिन बताए गई थी कहाँ?
बे अक्ल ! तेरा तो हाल बुरा !!
बाजू पर थी चमकती
सिलवटें बेंत की ।।
मुख पर सूजन
धंसी हुई आँखों में
आँसुओं की लहर थी तैरती ।
बिन कुछ बोले बोल गई थी।
है दिए तले अँधेरा
राज़ यह खोल गई थी।
बच्चों ने हाल सुनाया था।
माँ-बाप ने पीट कर
आंगन में घसीट कर
गाड़ी में झोंक कर
ईमानदारी का पाठ पढ़ाया था ।
उधर डाक्टर साहिबा की
अकड़ और बढ़ गई थी।
डाक्टर साहिबा के
शिशु के माथे
पाप जड़ गई थी।
फिर एक मासूम कली
पढ़े-लिखे अमीरों की
भेंट चढ़ गई थी ।।
-मुक्ता शर्मा

 

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About the Author:

सरकारी स्कूल में हिन्दी अध्यापक के पद पर कार्यरत,कालेज के समय से विचारों को संगठित कर प्रस्तुत करने की कोशिश में जुटी हुई , एक तुच्छ सी कवयित्री,हिन्दी भाषा की सेवा मे योगदान देने की कोशिश करती हुई ।

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