उतरी हुई नदी।

उतरी हुई नदी।

By | 2018-06-06T23:00:14+00:00 June 6th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , |0 Comments

दिये गये मिश्रे पर एक गजल :-

अपने होठों को हम हिला न सके।
बात दिल की जुबांँ पर ला न सके।।

मैंने कोशिश बहुत किया था मगर।
इश्क की रस्म हम निभा न सके।।

सारे रिश्ते खतम हुए उनसे।
उनकी तस्वीर हम हटा न सके।।

नदी उतरी हुई थी कहने को।
इसलिए उससे पार पा न सके।।

इश्क की आग में जलने वाले।
अपनी मर्जी से कुछ बुझा न सके।।

गीत हम दूसरों के गाते रहे।
गजल अपनी थी गुनगुना न सके।।
                                              – जयराम राय 

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