मांस के टुकड़े !!

मांस के टुकड़े !!

मांस के टुकड़े !!
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“बोल साली! तेरा नया यार ही था न, वो !! और बता क्या – क्या करती है, उसके साथ, आज वो साला मुहल्ले के नुक्कड़ तक छोड़ने आया है, कल वो तुझे ताजमहल घुमाने लेकर जायेगा और परसो तुम दोनों किसी मंदिर-वंदिर में शादी करके निकलोगे दिल्ली से, जैसे पहले भाग गयी थी शादी के ठीक तीन दिन बाद!!”

जोरदार थप्पड़ जड़ते हुए वीरेन महाशय ने अपनी पत्नी लवली को लत्ताड़ते हुए बोला।

बेचारी लवली, कुछ देर वहीं खड़ी सिसकियां भरती रही,फिर चली गयी अपने कमरे की ओर!!

दर’अस्ल वह नहीं जानती कि क्यों ये सब सह रही है! अपने ही घर में, अपने ही मायके में !!

कभी-कभी,
बड़े – बुज़ुर्गो का एक फैसला ही जिंदगी की सबसे बड़ी सज़ा भी बन जाता है, ठीक जैसे लवली कि जिंदगी के साथ हुआ !!

अब से साढ़े चार साल पहले !!
तीनों बहनों की शादी एक ही मंडप में, एक ही साथ, श्यामसुन्दर दास जी ने इसलिए कर दी थी कि उनके सीने पर लेटा हुआ साँप जल्द-से-जल्द उतर जाए!!

सिर से बोझ तो उतर गया लेकिन बेटियों की जिंदगी जहन्नुम होने के बारे में तनिक भी नही सोचें श्यामसुन्दर दास जी!!

उसके ठीक एक साल बाद ही बड़ी बेटी ने ख़ुद को आग लगाकर ख़ुदखुशी कर ली। मँझली बेटी सामाजिक प्रताड़ना’ओं का शिकार हुई अपने पति के देहव्यापार जैसे कुकर्म में शामिल होने के बजाय! कूद गयी पांच मंजिला छत से और मुक्त कर लिया अपने आप को , अपने पिता के फैसले से और अपने पति की बंदिशों से !!

अब बची थी लवली !!
उम्र लगभग अठारह साल ही रही होगी, जब उसकी शादी कर दी गयी!

अभी वह बारहवीं कक्षा में ही तो थी उसे दबा-दबाकर कि बेटी आज नहीं तो कल हमें तुम्हारी शादी करनी ही करनी है तो अभी क्या दिक्कत है, अभी क्य‍ा परेशानी है??

पढ़ाई भी बीच में ही छूट गयी और लवली का प्यार भी, हां! उसे प्यार था स्कूल में मोहन नाम के एक लड़के से !!

घर वालों की मर्जी से शादी तो कर ली वीरेन महाशय नाम के युवक से, अगली रात जिसे सुहागरात कहते हैं, रात भर इन्तज़ार करती रही लेकिन महाशय का अता पता ही नही कहां गायब रहा !!

सुबह जब उसने सास-ससुर से पूछा तो चुप्पी साध गये और कुछ दे बाद बोले देख री!! वो चाहे जो करे तुझे उस से मतलब नहीं है। वैसे भी तेरे बाबा ने दहेज में फूटी कोड़ी नही दी!!
बड़ी आयी मेरे राजा बेटे के बारे में पूछने, अरे! होगा अपने यार दोस्तों के साथ ! तू अपना काम कर, चल भग यहां से!!

अगली रात भी जब बारह बजे तक वीरेन घर नही आया तो लवली ने पड़ोस की चचेरी नन्द से पूछा। उसने बताया भाभी चौपाल पर होगा वो दिन रात बस जुआँ शराब मे ही रहता है !! आधी रात बीत चुकी थी मगर चौपाल पास में ही थी तो वह वीरेन को देखने पहुँच गयी !! देखा! तो वीरेन तो शराब में धुत धरती में सर घूंसे पड़ा है!! लवली ने उसे उठाने की कोशिश की तो वह उसी सुध पड़ा रहा नशे में!

इतनें में पीछे से कुछ शराबियों की आवाज आयी ? क्यों भाई रामू साला कितने दिन हो गये किसी कली को मसले हुए, भाई आज तो किस्मत ख़ुद चलकर हमारे पास आयी रे, आज नहीं छोड़ेंगे साली को!!!

लवली पहले से लड़को की तरह जीती आयी थी, उसने दोनों शराबियों को धक्का दिया और एक सूमसाम पड़ी सड़क पर तब तक दौड़ती रही जब तक सुब्ह् की पहली किरन उसके कदमों पे न गिरी!!

वह सीधे स्कूल गयी जहां मोहन पढ़ता था!! जब मोहन ने, लवली को उस हालत मे देखा तो वह दौड़ा उसके पास आया और बोला लवली ये कैसी हालत बना रखी है? इस से ज्यादा कुछ कहता, उससे पहले लवली उसके सीने से लिपट कर जोर-जोर से रोने लगी !!

जब सारी कहानी मोहन ने सुनी तो वह उठा और उसकी ओर पीठ कर खड़ा हो गया !!!

कुछ देर दोनों चुप थे!!

मोहन बोला,”तुमसे कभी कहने की हिम्मत न हुई थी . . . . . . . प्यार करता था तुमसे, आज भी बहुत करता हूँ। . .चलो भाग चलते हैं यहां से , कहीं दूर, जहां सिर्फ़ मैं और तुम हों, फिर हम शादी करके वहीं जीयेंगे एक दुसरे के लिए!!” लवली उसकी पीठ पर सर रखकर रोने लगी !! और बोली मैं तुम्हारी जिंदगी बरबाद करना नहीं चाहती !!

मोहन ने लवली का मुखड़ा अपने हाथों में लिया और बोला,”मेरी जिंदगी तो तुम हो, पगली !! पिताजी को राजनीति से फुरसत नही,मेरे पास पैसा है,बड़ा घर है,लेकिन प्यार करने वाला कोई भी नही है। इस तरह सीने से लिपट कर दुख: बाटने वाला कोई भी नहीं है। हां, एक मां ही थी , दस साल पहले वो भी मुझे अकेला कर गयी !!

वह दोनों मुम्बईआकर एक साथ में रहने लगे मोहन पढ़ने -लिखने में होशियार था तो उसे एक कम्पनी में सुपरवाईजरी की नौकरी मिल गयी! दोनों ने शिव जी कृपा से मंदिर में शादी कर ली और महिने दिन महिने दोनों की खुशियों ने उनके लिए छोटी सी दुनिया बसानी शुरू कर दी !!

मोहन चाहता था कि इस छोटी सी दुनिया में जल्द ही किलकारियां गूंजे कोई साहिबज़ादी आये, लेकिन लवली हर दिन ये कहकर टाल देती,!! “मोहन, अभी हमें एक दुसरे को वक़्त देना चाहिए, मैं भी चाहती हूँ लेकिन अभी एक साल भी नहीं हुआ हमें मुम्बई आये हुए !”

शायद ! अनहोनी का मोहन को पहले से ही आभास हो गया था !

आज उनकी शादी की सालगिरह थी मोहन लवली को एक गिफ्ट देना चाहता था वह कोई बहाना करके फ्लैट से निकल गया !!! लवली ने बहुत रोका लेकिन मोहन ने एक न सुनी, वह गाड़ी लेकर लवली को बहलाते-फुसलाते हुए चला,”अभी आया कम्पनी का एक काम याद आ गया लेकिन तुरन्त लौट आऊंगा, फिक़्र की क्या बात है!!”

शाम होने को आई लेकिन मोहन लौट कर नहीं आया रात दस बजे पुलिस स्टेशन से फोन आया कि. . . . .मोहन की कार हादसे में मौत हो गयी है!!

बेचारी लवली!!!

जिन्दगी अभी सम्भली भी नहीं थी कि सब ख़त्म हो गया!! फिर मुम्बई मे बचा ही क्या था ?

श्यामसुन्दर दास जी ने शादियाँ तो कर दी थी लेकिन दो बेटियों के अचानक ख़ुदखुशी करने का सदमा वह भी न बरदाश्त कर सके और चल बसे !!

मुसलसल हादसों ने लवली की जिंदगी, घर-बार, सब तवाह कर दिया था !! वक़्त इतना क़हर भी ढा सकता है लवली को अपने दुखोंक्ते बारे में तो पता था लेकिन दोनों बहनों व श्यामसुन्दर दास जी की मौत की बिल्कुल भी ख़ैर-ओ-ख़बर नहीं थी!!

मोहन की मौत के बाद लवली दिल्ली चली आई उसी घर में जहां से उसकी बरबादी शुरु हुई थी !!

घर आकर जब उसने कुण्डी खड़खड़ायी तो एक छोटी सी बच्ची ने दरवाजा खोला जिसका नाम था,छोटी ! ये थी लवली की सबसे छोटी बहन !! बहुत जोर-जोर से लिपट कर रोई, छोटी लवली को पाकर!!!

“छोटी ! बाबा, काकी कोई भी घर में दिखाई क्यों नहीं दे रहे!!” लवली ने छोटी से पूछा !!

वो एकटक देखती रही और मायूस होकर बोली दीदी आपके घर से जाने के बाद सब खत्म हो गया !! बड़ी दीदी और मंझली दीदी के ख़ुदख़ुशी करने के बाद बाबा भी सदमे में चल बसे!!!

“क्या?”

ये सुनकर लवली जैसे बेहोश हो गयी थी!!!!

छोटी ने रात भर लवली का सर दबाया माथे पर भीगी पट्टियां बदली तब जाके सुब्ह तक होश आया लवली को!!!

कहते हैं वक़्त एक ऐसा मरहम है जो हरेक घाव को धीरे- धीरे भर देता है। घर में अब छोटी, काकी और लवली ही बचे थे !! छोटी की परवरिश का जिम्मा और घर का खर्च अगैरहा- बगैरहा सब लवली पर ही निर्भर था !! लवली हाईस्कूल तो कम से कम थी ही, तो एक कम्पनी में जैसे तैसे एक नौकरी ढूंढ ली और लगभग एक साल में सब सही सा होता दिखने लगा !! छोटी और काकी भी अब ग़म से उबर आयी थी और सब ठीक चलने लगा था !!!

लवली के ज़ख्म अभी पूरे भरे भी नहीं थे कि एक दिन सुब्ह घर की चौखट पर वीरेन महाशय ने दस्तक दी !! उसे देख लवली ने दरवाजा बन्द कर लिया !! लेकिन वह दरवाजा शाम तक खटखटाता रहा, कहता रहा कि अब मैं सुधर गया हूँ मैनें सारे गलत काम छोड़ दिये हैं ! अब मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ मुझे माफ़ कर दो !! शाम को काकी ने दरवाजा खोला तो उनके पांव मे गिरकर माफ़ी मांगने लगा !! इतने में लवली पीछे से आकर बोली, “तुम चाहते क्या हो, पहले मेरी जिंदगी तबाह कर दी जो फिर चले आये?”
कईं दिन गिड़गिड़ाने पर काकी ने लवली को बोला बेटी तू कब तक हमारे लिए करती रहेगी आगे तुझे भी तो अपना घर बच्चे सँभालने ही हैं, न?

लगत‍ा है,वीरेन अब सही में सुधर गया है वरन् इतने दिनों से गिड़गिड़ाता नहीं।

“ठीक है काकी रख लीजिए उसे घर में!” लवली ने बोला !!

जैसे महाशय, सब सुन रहा था तुरन्त आ टपका!! “मुझे पता था लवली तुम इतनी भी पत्थरदिल नही हो सकती !! आख़िर हम शादीशुदा जो हैं !!” वीरेन उछलते हुए बोला !!

लवली ने लताड़ते हुए कहा,”देखिए वीरेन महाशय! यहां पत्नी तुम हो, और पति हैं हम क्योंकि ये तुम्हारी ससुर‍ाल है मायका नहीं।”

वो चुप होकर घर के अंदर चला गया !! जैसे उसकी रेलगाड़ी को हरी झंडी मिल गयी हो !!

कहते हैं कि कुत्ते की दुम को अगर बारह साल तक भी नली में रक्ख़ा जाये तो वह टेढ़ी की टेढ़ी ही रहती है!!

मगरमच्छ के आंसू दिखाकर वीरेन लवली के घर में इसलिए घुसा क्योंकि अपनी ज़मीन जायदाद बेचकर तो जुएं में उड़ा दी थी !!!

कम्पनी में सूरज नाम का शख़्स लवली के साथ ही काम करता था !!लवली भी पसन्द करती थी उसे, दोनों में दोस्ती हुई और मिलना जुलना शुरू हो गया !!! कभी कम्पनी से लौटते तो कम्पनी के लंच टाइम में सूरज लवली को अपनी मोटर साइकिल पर घुमाने ले जाता !!

कुछ खुशी के फूल जैसे लवली के मन की बगिया में पुन: खिलने लगे थे !!

लेकिन धीरे धीरे वीरेन रंग बदलने लगा !! उसने वहीं के कुछ लठैतों से दोस्ती भी कर ली और अब तो दिन भर जुआँ और शराब में धुत रहता !!! पूरा वही माहोल जो उसने शादी के समय रक्ख़ा था वही फिर से शुरू कर दिया !!! लवली दिन भर कम्पनी में काम करती और रात में उसकी जबरदस्ती हरकतें सहती !!

अब तो लवली पर हाथ भी उठाने लगा था वह, काकी ने उसे मना किया तो वह बोला “देख बुढ़िया, ज्यादा बोली तो तेरा गला दबा दूंगा और छोटी को बेच आऊंगा कोठे पर, मैं वीरेन हूँ वीरेन महाशय!!”

साला! तुमको क्या लगा तुम्हारे टूकड़ो पर पलने आया हूँ,मैं !! शादी के बाद मुझे छोड़कर भागी थी,ये लवली ! क्या – क्या नहीं कहा गांव वालों ने मुझे, कितनी बेईज्जती झेली है, मैनें !!!

वही बदला चाहिए मुझे!!!

उधर, लवली और सूरज की नजदीकियां बढ़ रही थी!!!
आये दिन वह लवली को कम्पनी के बाद मुहल्ले के नुक्कड़ तक छोड़ जाता था !! बात धीरे धीरे प्यार में तब्दील हो रही थी !! कि किसी ने लवली को छोड़ते वक़्त दोनों को देख लिया और वीरेन महाशय के कान भर दिए।

अगली सुब्ह जैसे ही बरामदे में लवली आयी तो जोरदार थप्पड़ लगाते हुए वीरेन बोला, “बोल साली! तेरा नया यार ही था न, वो !! और बता क्या – क्या करती है, उसके साथ, आज वो साला मुहल्ले के नुक्कड़ तक छोड़ने आया है, कल वो तुझे ताजमहल घुमाने लेकर जायेगा और परसो तुम दोनों किसी मंदिर-वंदिर में शादी करके निकलोगे दिल्ली से, जैसे पहले भाग गयी थी शादी के ठीक तीन दिन बाद!

( कहानी का पहला वाक्यांश यहीं से शुरू हुआ था !)

अब तो लवली ने निर्णय ले लिया था कि अब वीरेन को अपने घर में रहने नहीं देगी। चाहे कुछ भी हो!!

उसने वीरेन को धक्के मार मार के घर से बाहर कर दिया बहुत देर तक वीरेन लवली के बीच झड़प हुई लेकिन जैसे ही पुलिस का जिक्र आया तो वीरेन डर सा गया और चुपचाप निकल गया घर से !!!

बाहर खड़ा होकर बोला कि पुलिस यहां आयेगी तो जरूर लेकिन . . . हाहा . . हाहाहा. . .जोर जोर से हँसने लगा !!!!

एक दिन – रात बीती और लवली को लगा सब शान्त है! आज वह सूरज के साथ बाहर जाने वाली थी लेकिन इसके चलते वह नहीं जा पायी!!
लेकिन सूरज भी अब लवली को बहुत प्यार करने लगा था !!

शाम के समय किसी ने घर की कुंडी खड़कायी, लवली को लगा फिर वीरेन ही आया होगा !!

तो उसने एक हाथ में चाकू उठा लिया और दूसरे हाथ से दरवाजा खोलने लगी !! जैसे ही दरवाजा खोला तो लवली वार करने ही वाली थी !!

“हे! रुक रुक, घर आये लोगों को सीधे टपका ही डालती हो क्या?” आवाज़ लगाता सूरज बोला।

ओह, ओह सॉरी – सॉरी मुझे लगा . . . . .वो वीरे. . .!

अरे !! अब घर के अन्दर भी नहीं बुलाओगी क्या ?

“अरे! आप आइये न!”

दर’अस्ल मिलने नही आ पायी माफ़ी चाहती हूँ। यहां कुछ प्रोब्लम्स थे इसी वजह से !!!

माफ़ कर दीजिए, हमें !!

“तुम्हारी इसी मासूमी’अत की वज़ह से आपसे मुहब्बत हो गयी है।” सूरज बोला!!

लवली पलकें झुका कर शरमा गयी
और कुछ देर बाद बोली कि आप हमारे बारे में अभी जानते ही क्या हो सूरज बाबू!! हम आपको क्या बतायें “अपनी जिंदगी” !!!

उधर, वीरेन को किसी ने खबर कर दी थी कि आज सूरज तेरी पत्नी से मिलने आया है !!

वीरेन आग बबूला होकर बोला,
“अच्छा हुआ साला मुर्गा भी मुर्गी के साथ में हलाल होने चला आया!!”

सर्द रात बढ़ रही थी गज़र के वक़्त की तरफ़, लवली सूरज से बोली,”आज रात आप यहीं रुक जाइए न?”

लवली जी एक शर्त पर रुक सकता हूँ। वह बोली,शर्त कैसी,अच्छा बताइए क्या है शर्त मुनासिब होगी तो जरूर हामी भर देंगे।

“अच्छा, क्या आप हमसे प्यार करती हैं?, आज हम आपसे प्यार का जवाब मांगना चाहते थे लेकिन आप आयी ही नही मिलने!?”

लवली शान्त थी तो सूरज कदम बढ़ाते हुए बोला,”आपकी ख़ामोशी जवाब दे गयी,अच्छा चलता हूँ।”

कुछ क़दम ही बढ़ाए थे सूरज ने कि आवाज़ आयी !

“सुनिए सूरज बाबू!”
और लवली सूरज से जाकर पीठ की से लिपट गयी !! फिर बोली “मेरी जिंदगी ग़मों का अथहा सागर है, अच्छा होगा तुम जाओ यहां से!”

सूरज ने उसके चहरे को अपने हाथो में लिया और बोला इस ग़म के सागर की बूंद -बूंद पी लूंगा मैं, तू मेरी जिंदगी है पगली !!

एकबार को जैसे मोहन की वही स्मृतियाँ लवली की आंखों मे निखर आयी थी !! लवली ने ख़ुद को सूरज के हवाले कर दिया और उसका माथा चूम लिया!!

“तुम्हें बहुत प्यार करने लगी हूँ। इतने दुख में हूँ तुम्हारी जरूरत बहुत महसूस होती है!!

वे दोनों जैसे ही कमरे की तरफ बढ़े दरवाजा खुलते ही वीरेन ने लवली की आँखों के सामने ही तलवार सूरज के सीने में उतार डाली !!!

बारम्बार लवली और सूरज को जर्जर कर मार डाला, कमीने ने बहुत बुरी मौत दी !!!

और,
वीरेन रात में ही फ़रार हो गया !!

अगली सुब्ह जब छोटी ने खून से सना लवली का कमरा देखा, छींटों से सनें बिस्तर के कपड़े देखें।

तो वह बहुत जोर से चिल्लाई, पूरा
मोहल्ला इकट्ठा हो गया !! उस कमरे से बहुत बदबू आ रही थी!

पुलिस जब छानबीन करने आयी,
तो बदबू लगातार अभी भी आ रही थी !!

कमरे मे पड़ा था, एक डबल बेड, जैसे ही एक पुलिसकर्मी ने बेड का तख्ता हटाया !

उसमें मिलें . . . .बर्बर हुए,

. . दो ज़िस्मों के,

मांस के टुकड़े” !!

 

-© जंगवीर सिहँ ‘राकेश’✍

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