रेखा

रेखा

By | 2018-06-10T19:36:11+00:00 June 10th, 2018|Categories: संस्मरण|Tags: , , |0 Comments

रेखा :संस्मरण

दुनिया में कई तरह के लोग होते है,कुछ ऐसे की जिनके सान्निध्य में भटका हुआ भी पथ पा जाये ,कुछ ऐसे कि मंजिल तक पहुँचकर भी इंसान पथ भूल जाये ।हमें ऐसै लोगों कीपहचान अवश्य करनी चाहिए ।
मुझे याद आता है जब मैं पहले ही दिन
यूनिवर्सिटी गयी थी,मैं काफी डरी हुई थी ।वहाँ
लड़के व लड़कियाँ एक साथ पढ़ते थे । मैने अभी तक लड़कियों के स्कूल और कॉलेज में ही पढ़ाई की थी । साथ ही मेरे साथ आने जाने वाली कोई भी लड़की
नहीं थी । मैं बिलकुल अकेले क्लास तक पहुँची
वहाँ लड़के ज्यादा थे और लड़कियां बहुतकम।
तभी एक सुन्दर सी लम्बी लड़की मेरे पास आकर बैठ गयी । देखने में भी काफी अमीर लग रही थी । मैं चुपचाप बैठी थी तभी प्रवक्ता
वहाँ आये उन्होने सभी से परिचय पूछा ,थोड़ा
बहुत नैतिकमूल्यों पर बात की और चले गये ।
खाली पीरियड होते ही वह मुझसे बोली तुम्हारा नाम क्या है ?कहाँ से आती हो ?
मैं थोड़ा सहज हो गयी ,मैने भी उसके बारे में
पूछा वह विश्वविद्यालय के पास ही रहती थी ।उसके अंदर किसी तरह का घमंड नहीं था।
धीरे-धीरे मेरी उससे मित्रता हो गयी ।जैसे ही उसे पता चला की मैं बहुत ही दूर से पढ़ने
विश्वविद्यालय आती हूँ और मुझे दो घंटे बस का इंतजार करना पड़ता है वह जबरन मुझे घर ले गयी । वहाँ उसकी मम्मी ने भी मुझे रुकने के लिए कहा ।अब छुट्टी होने के बाद मैं उसी के
घर पर रूक जाती और बस का समय होने पर
चली जाती । उसकी मम्मी रोज दोपहर का
खाना खिलातीं और बड़े ही प्यार से बात करती
थीं।
अगर उसके घरपर रूकने की व्यवस्था
न होती तो शायद मैं नियमित रूप से पढ़ने नहीं
जा पाती लेकिन उसी के कारण मैं नियमित रूप से विश्वविद्यालय जा सकी और अपनी
पढ़ाई पूरी कर सकी ।मैं उसकी सदा हीआभारी
रहूँगी ।
डॉ.सरला सिंह

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शिक्षण कार्य टी.जी.टी.हिन्दी खाली समय में लेखन कार्य।

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