बच्चें

बच्चें

By | 2018-06-12T21:08:06+00:00 June 12th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

वो आये लेकर किलकारी
खुशिया बरसी ऐसे जैसे बरखा जारी,
सब के चेहरे देख दमक गये
भरने बाहो मे सब उन्हें धमक गये,

कहते हे बच्चे होते घर की शान हे
होते बच्चे जहां बसते वहां भगवान हे,
उनकी मस्ती, उनकी वो अनजान बाते
बनकर बच्चे हम भी उनको हंसाते,

वो बेतुकी बातो से भी हंस जाते हे
तुतलाना फिर से हमे बनाते हे,
उनके चेहरे पर गजब की हंसी आती हे
धडकने भी हमारी खुश हो जाती हे,

वो आव-आव चिल्लाना
वो उठे ले कोई गोद मे तो कुछ रो जाना,
मन मर्जी का काम सबसे करवाना
घर के बडे से छोटे तक को सेवादार बनाना,

ये सब बिन कहे बच्चे कर जाते हे
चंद पल मे हसना सिखाते हे,
पैरो बिना,चल घुटनो पर ही ना जाने
हजारो खुशियां घर आंगन मे भर जाते हे..

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