मेरा गांव

मेरा गांव

By | 2018-06-13T21:02:07+00:00 June 13th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

मेरा  गांव तेरे  शहर से  अच्छा है।
इस्लाम  चाचा हों, या  भूरी काकी,
जानता मुझको  बच्चा  बच्चा है।
घर भले ही  गारे  मिट्टी के कच्चे हों,
लेकिन  दिल उनका  सच्चा है।

Comments

comments

No votes yet.
Please wait...
Spread the love
  • 3
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    3
    Shares

About the Author:

Leave A Comment