बढ़ती उम्र और आप

बढ़ती उम्र और आप

बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है,थोड़ा  लाइफ स्टाइल में परिवर्तन किया जाय। वृद्धावस्था एक  स्वाभाविक अवस्था है, जो *जीवन चक्र का अंतिम  पड़ाव है।इसका  स्वागत कीजिये,*आपके पास अनुभवों की  अमूल्य सम्पदा है।इस परिवर्तन को अगर धैर्य,सहनशीलता,आत्मविश्वास और आध्यात्मिकता के साथ  सकारात्मक होकर बिताएंगे,तो समय भलीभांति व्यतीत होगा  अन्यथा——आप स्वयं अपने सबसे बड़े  शत्रु साबित होंगे।
अपने स्वयं को सबसे बड़ा कर्ता, एवं  बेचारा महसूस करने से बचें।क्रोध का त्याग करें। क्षमा भाव अपनाएं।दूसरों द्वारा गलती होने पर भी सहज भाव से रहें।  अकड़ में रहना  कहाँ तक  ठीक है।धैर्य,क्षमा,ये सब बड़प्पन की निशानी है।
बढ़ती उम्र में हमारे अंगों तथा मांसपेशियों को अधिक श्रम करना पड़ता है, अतः पोषक तथा  संतुलित आहार लेना अति आवश्यक है।अलसी, अखरोट, मूँगफली, बादाम आदि में ओमेगा3 पाया जाता है, इनका सेवन करें।
*च्यवनप्राश,आंवला,सूखे मेवे,फलाहार,सात्विक एवं पौष्टिक भोजन, साबुत अनाज ,तुलसी त्रिफला का प्रयोग करें। भूख से कम खाएं। ताजे फल,हरी सब्जियां, भरपूर पानी पियें।
दिनचर्या व्यवस्थित रखें। इस उम्र में हृदय व फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो जाती है।अतः जाँच करवाते रहें,तथा शारीरिक व्यायाम से स्वयं को चुस्त रखें। केवल आयु का हवाला देकर  आलसी न पड़े रहें।लोगों से मिलते रहें, सकारात्मक सोच होने में मदद मिलेगी।  मिलने जुलने से  अवसाद की सम्भावना कम रहेगी। नए लोगों से मिलने जुलने में शरीर में एंडोराफन्स एक्टिव होता है, जो एक प्रकार का ब्रेन केमिकल ( रसायन )है।इसे न्यूरोट्रांसमीटर्स के नाम से भी जाना जाता है।यह रसायन व्यक्ति को होने वाले किसी प्रकार के दर्द को दूर करने के साथ अवसाद से भी बचाता है।इस रसायन के रिलीज होने से व्यक्ति का मूड भी बेहतर होता है।
सैर करने से रक्त संचार बढ़ता है* तथा शरीर का कॉलेस्ट्रोल नियंत्रित रहता है।पैरों तक रक्त संचार होने से पैर दर्द की शिकायत भी दूर होती है,तथा तन और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।
भोजन में सभी तरह के  न्यूट्रिएंट्स शामिल करने चाहिए।शरीर में इनकी कमी होने पर कार्डियोवेस्क्युलर डिजीज व अल्जाइमर आदि की आशंका हो सकती है। विटामिन डी की कमी कमजोर हड्डियां, रक्तचाप,कैंसर आदि का खतरा बढ़ा सकती हैं।इसलिए सभी तरह के पोषक तत्व भोजन में शमिल किये जायँ।फायबर युक्त भोजन लें, जिससे कब्ज नहीं होगी।
देर रात आठ बजे बाद खाना नहीं खाएं।कई बुजुर्ग शाम 7 बजे TV देखते देखते सो जाएंगे, फिर दस बजे खाना खायेंगे।जहाँ एक ओर पेट में गैस, जलन, सांस में रुकावट,भारीपन महसूस होगा वहीं रात को नींद भी नहीं आएगी।वृद्धों को तो केवल घर पर ही रहना है, लेकिन आप की वजह से पूरा घर परेशान होगा, जिन्हें और भी कार्य करने होते हैं। एसा  नहीं होता कि हमेशा  वृद्ध ही  सही हों, और बच्चे गलत हों, आप को स्वस्थ रहने में आप की भी जिम्मेदारी बनती है, सच को  स्वीकारें।
इस उम्र में  स्वाध्याय,मैडिटेशन( ध्यान), नियमित व्यायाम को तरजीह दें। इलेक्ट्रॉनिक आइटम से  दूरी बनाएं।
और एक जरूरी बात,आप स्वयं अपना आकलन करें, समाज,बेटे बहू इतने बुरे तो नहीं जितना आप समझते हैं, कुछ  कमियां तो  आपकी भी रहती होंगी।जितने आप के बेटी दामाद सगे हैं, उससे कहीं ज्यादा बेटे बहू भी होंगे ।उन्हें भी कभी अपने पास बिठाकर वैसी ही बातें कीजिये जैसी आप बेटियों, दामादों से करते हैं।गौर कीजिये कहीं आप हर समय  बेचारगी भरे पोस्ट तो लाइक नहीं करते रहते,ये सब चीजें आपको  हकीकत से  दूर करती हैं, वर्तमान में रहना सीखिये।
और एक मशहूर गाने की पंक्तियाँ याद आ रही हैं——-
मौत आनी है आएगी एक दिन,
जान जानी है जायेगी एक  दिन,
एसी बातों से क्या घबराना।यह तो जिंदगी का अटल सत्य है, अवश्यम्भावी है।स्वयं को इसके लिए तैयार कीजिये। ( कल जो आप के पास था,उसके हस्तांतरण का समय आ गया है।) मोह में फंसे रह कर हर समय मेरा मेरा करते रहेंगे तो होगा कुछ नहीं उलटे आप ही परेशान होंगे। सब के ऊपर से अपनी पकड़ छोड़िये।आप के कंट्रोल में कुछ भी नहीं है, और जो है  यानि स्वयं को बदलना वो आप करते नहीं, आप अपनी जिंदगी जी चुके हैं अपनी इच्छानुसार ,अब अगली पीढ़ी की बारी है।जीने दीजिये उन्हें अपनी जिंदगी,फिर देखिये कैसे ये बच्चे आप से सारी बातें शेयर करेंगे,हाँ जब जरूरत हो तो मार्ग दर्शन अवश्य कीजिये।
जब आप अपनी मर्जी से  वैराग्य भाव अपनाएंगे तो दुःख नहीं होगा,अन्यथा आप भी परेशान साथ वाले भी परेशान।*अपने को तैयार कीजिये,एक आत्मा का परमात्मा से मिलन के लिए*।खुद भी स्वस्थ रहिये तथा दूसरों के लिए उदाहरण बनिए।कुछ चीजें जब अपने हाथ में ना हो तो उन्हें हरि इच्छा मान लेना ही बेहतर है।क्योंकि एक वही है जो जानता है हमारे लिए क्या उचित है।

मनु वाशिष्ठ

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