मेहनत से ही सब कुछ

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मेहनत से ही सब कुछ

By |2018-01-20T17:08:52+00:00April 15th, 2016|Categories: बाल कथाएँ|Tags: |0 Comments

पुराने जमाने की बात है । एक मजदूर बिल्कुल अकेला था । कभी आवश्यकता होती मजदूरी कर लेता तो कभी यूं ही रह जाता । एक बार उसके पास खाने को कुछ नहीं था । वह घर से मजदूरी करने के लिए निकल पड़ा गर्मी का मौसम था और धूप बहुत तेज थी । उसे एक व्यक्ति दिखा जिसने एक भारी संदूक उठा रखी थी । उसने उस व्यक्ति से पूछा क्या आपको मजदूर चाहिए । उस व्यक्ति को मजदूर की आवश्यकता भी थी । इसीलिए उसने संदूक मजदूर को उठाने के लिए दे दिया । संदूक को कंधे पर रखकर मजदूर चलने लगा । गरीबी के कारण उसके पैरों में जूते नहीं थे सड़क की जलन से बचने के लिए कभी वह किसी पेड़ की छाया में थोड़ी देर खड़ा हो जाता था । पैर जलने से वह मन ही मन झुंझला उठा और उस व्यक्ति से बोल ईश्वर भी कैसा अन्यायी है । हम गरीबों को जूते पहनने लायक पैसे भी नहीं दिए । मजदूर की बात सुनकर व्यक्ति खामोश रहा । दोनों थोड़ा आगे बढ़े ही थे कि तभी उन्हें एक ऐसा व्यक्ति दिखा जिसके पैर ही नहीं थे और वह जमीन पर घिसडते हुए चल रहा था । यह देखकर वह व्यक्ति मजदूर से बोला । तुम्हारे पास तो जूते नहीं है , परन्तु इसके तो पैर ही नहीं है । जितना कष्ट तुम्हे हो रहा है उससे कहीं अधिक कष्ट इस समय इस व्यक्ति को हो रहा होगा । तुमसे भी छोटे और दुखी लोग संसार में है । तुम्हें जूते चाहिए तो अधिक मेहनत करों । हिम्मत हार कर ईश्वर को दोष देने की जरुरत नहीं । ईश्वर ने नकद पैसे तो आज तक किसी को भी नहीं दिए । परन्तु मौके सभी को बराबर दिए है । उस व्यक्ति की बातों का मजदूर पर गहरा असर हुआ । वह उस दिन से अपनी कमियों को दूर कर अपनी योग्यता से मेहनत के बल पर बेहतर जीवन जीने का प्रयास करने लगा

– आनन्द

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