बेटी

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बेटी

By |2018-01-20T17:08:50+00:00April 18th, 2016|Categories: कहानी|Tags: |0 Comments

कुछ ऊम्र थी मंजरी के बचपने की |हा सखियों संग हंसी ठिठोली करके कब दिन गुजर जाता पता नही चलता था|सारा दिन स्कुल कोचिंग मे बीत जाता|शाम को ही परिवार वालों के साथ टाईम मिल पाता|
वक्त बीत रहा था,लड़कियां है भाई तो जल्दी शादी तो होगी ना, इंडिया ही बदला है लोगो की सोच नही|बेटी है ज्यादा दिन घर पर ना रखी जायेगी ,है ना ये सोच है हमारे समाज की नही तो आपके आस -पास के लोग ही बाते बनाने लगते है|
मंजरी की शादी कर दी गयी|रिती रिवाज के अनुसार ससुराल वालों की बात मानी, गृहणी बन गयी|
क्या था फिर शुरु हुई उसकी शादी शुदा जिन्दगी| प्रतिदिन के सास नन्द के ताने थे|पर क्या करती कच्ची ऊम्र मे जो शादी हुई थी |ना समझ थी ना सब कुछ चुप सहने की आदत जो थी और क्यों ना हो ,आज्ञाकारी बहु जो है| दिन बीत ही रहे थे|
कई दिनो बाद मुलाकात उसकी स्कुल की सखी रानी से मुलाकात हुई|बहुत खुश थी रानी,क्यों ना हो डॉक्टर पति जो मिल रहा नसीब वाली को ही पढ़ा लिखा पति मिलता है ,युं तो खुद भी कुछ कम ना थी,लम्बी ,गोरीसुंदर बिल्कुल वही जो हर लड़का सोचता है वैसी राजकुमारी थी|
शादी भी सम्पन्न हुई|कुछ दिन तो शुरुआत मे अच्छे बीते पर बाद मे मंजरी की तरह ही इसकी हालत हो रही थी|सास थी ताने देने वालीखुद की चलाने वाली|हां बात बात पर रानी को नीचा दिखाया जाता|अहसास कराया जाता कि वह दुसरे घर से आयी है,बहु है उस घर की|यहां तक की पति तो कभी सुनता भी ना था ,की रानी कोई बात भी कर रही है|रानी तो घर से बाहर भी नही निकल सकती थी क्योंकि बहु थी ,ना ही किसी से मिलने दिया जाता|
वक्त बीत रहा था खुशी ने दस्तक दी रानी की जिन्दगी मे,हा जी गर्भ से हुई |सोचा शायद अब उसके घरवाले उसे समझेंगे|खुश होंगे,पर कहां | प्रतिदिन सास कहती रानी से मुझे तो मेरा पोता ही चाहिये,पोता आयेगा मेरा|
पति जब भी बात करता रानी से यही की बेटा चाहिये उसे |रानी खुब कोशिश करती समझाने की पर कोई समझने वाला नही था उसे उस घर मे| रानी फिर मन को तसल्ली देकर खुश होने की कोशिश करती|
बीत रहा समय इकइक पल की बेटी होगी या बेटा ?
समय पुरा हुआ नन्हा मेहमान आया|हा जी बेटी हुई|
पहली बार मां बनने की खुशी भी किसी के साथ बांट नही सकती थी,क्योंकि घरवाले तो नाराज हो गये की बेटी को क्यों जन्म दिया|सास तो बुरा भला कहकर गयी ,तु कर्मफुटी है ना जाने कहां से लायी है हमारा नही है, ये बच्चा ,हमारा तो बेटा ही होता,बेटी तो हो ही नही सकती |
पति ने देखते ही कह दिया ले जाना इसे खुद के घर छोड़ आना |मेरे साथ रहना है तो बेटी को कही और छोड़कर आना|
वो जो उस बच्ची का पिता था डॉ.वो कह रहा था| शर्म आती है जो डॉक्टर मनुष्यों को जिन्दगी देता है,वही डॉक्टर खुद से जन्मी बेटी को अपना नही रहा क्योंकि इक बेटी हुई ना|
रानी क्या करती बेचारी बेटी को लेकर खुद के घर पर चली गयी कब तक ना कहे घर वालों से सब पता चलना था ईक दिन तो मां के पास बैठकर उसने अपनी सारी आप बीती बतायी| माँ ने कहा बेटी कुछ दिन रुक जा आ जायेगे दामाद जी तुझे लेने और तुम्हारी बिटिया को लेने |जाना तो तुम्हे उस घर ही है अब वही तुम्हारा घर है|
कई दिन बीते पर पति ने एक फोन तक नही किया|
रानी फोन करती तो रिसीव नही करता था|
क्या करती इक एक दिन काट रही थी.डॉक्टर पति मिलने की खुशी गम मे बदल गयी |अपनी बेटी को इस तरह छोड़ भी नही सकती थी दुधमुही बच्ची थी ,माँ के बिना कैसे जीती|रानी भी तो अब बच्ची के बिना नही रह सकती थी| अब रानी बिमार रहने लगी थी ,चिंता मे की बच्ची का क्या होगा ? कुछ दिन बाद बच्ची के साथ बाजार तरफ निकल गयी की मन कहीं और लगे|रास्ते मे उसे मंजरी दिखायी दी|बहुत खुश हुई दोनो इतने दिन बाद जो मिल रही थी|पास मे ही जुस की दुकान पर बैठ गयी,दोनो ही खुद की आप बीती बताने लगी |मंजरी सोच मे डुब गयी डॉक्टर पिता ऐसा होगा तो साधारण पिता कैसा होगा?
मंजरी ने रानी को सलाह दी की बेटी को तुमने जन्म दिया है| इसे किसी और के भरोसे कैसे छोड़ सकती हो?जब पिता एेसा है तो सोच कि आगे दुनिया कैसी होगी?क्यों ना तुम बेटी के साथ रहो ,उसे पाल पोसकर बड़ा करो|पति अगर खुद के द्वारा जन्म दी गयी बेटी का ना हो सका वो पत्नी का क्या होगा?
मंजरी ने भी खुद की समझ के अनुसार ही उसे सलाह दी थी|
रानी ने काफी सोचा और अंत मे निष्कर्स निकाला कि वह अपनी बेटी के साथ रहेगी|उसे बड़ा करेगी| ना जाने कहां कहाँ उसकी बेटी को भेड़यो का सामना करना पड़ेगा?इसलिये हरपल वो अपनी बेटी के साथ रहेगी|
इस तरह रानी ने नयी जिन्दगी की शुरुआत की ,खुद का छोटा सा ब्युटी पार्लर खोला और अपनी बेटी के साथ जिन्दगी मे व्यस्त रहने लगी|
अपनी बेटी की जिन्दगी बचा ली| अब रानी खुद की सम्मान भरी जिन्दगी जी रही है बेटी के साथ|

कहानी कैसी लगी कृप्या बताये| मेरा मार्ग दर्शन करें|

– प्रमिला चौधरी

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