रावण

हे सीता अभिमान न कर
रावण को तूने झुका दिया
अपनी अस्मिता की रक्षा में
रावण की लंका जला दिया।

क्युकी उस त्रेता के रावण की
अपनी भी कुछ मर्यादा थी
माना वो जीता था छल से
पर उसमे मानवता बाकी थी।

आज यहाँ इस कलयुग में
दानव ही दानव का डेरा
हर चौखट पे रावण पाया
हर गली दुर्योधन का साया।

ना कोई राम है लड़ने को
ना कृष्ण हैं लीला करने को
असहाय आँखों में अब
उम्मीद भी ना हैं लड़ने को।

मूक धृतराष्ट्र से दर्शक हैं
भीनी अश्रु की धार लिए
मरने पर शोक मनाते हैं
पुष्प श्रद्धा का हाथ लिए।

– Vandana
 

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu