मेरे आत्मज

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मेरे आत्मज

By |2016-07-17T20:44:14+00:00May 24th, 2016|Categories: कविता|0 Comments

मैं आत्मजा

 

तेरे ही हूँ मैं पाती

हूँ तुझ से आकार लिया

तेरे जीवन की मैं धाती

 

तूने मुझमें जीवन पाया

तेरा स्वास स्वास भर आया

मेरे आने से जीवन में

तूने जैसे नवजीवन पाया

 

मैं तनया तू आत्मज मेरा

तेरी छाया हैं आंगन मेरा

तेरे ही हाथों को थामे

जीवन के हर सुख दुःख झेला

 

मेरे सांसों की डोरी पर

हर पल हैं अधिकार हैं तेरा

मुझको सुता जान भी तूने

दिया प्राण ये सम्मान है तेरा

 

तू बाबुल  तू पिता है

तू  ही मेरा विधाता है

तू सृजन हार परमात्मा

पर मैं हूँ तेरी आत्मा।

– vandana mishra

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