हमसे है हरियाली

हम नन्हें तरू है , हमसे है हरियाली
मत काटो हमको , हमसे है हरियाली

पादप काटोगे बढ़ जायेगी गर्मी
हमको न जलाओ हमसे है हरियाली

पी गये धरा का सब जल काट हमें तुम
हमको न सताओ हमसे है हरियाली

पाई पाई हिसाब अब देना होगा
नित हमें लगाओ हमसे है हरियाली

ताप को जमीं से अब तो दूर भगाओ
हरा भरे हम हो  हमसे है हरियाली

लेखक / लेखिका : डॉ मधु त्रिवेदी

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