सफ़र रेल गाडी का

मैं पटरी पर चलती रोज
लगता मुझे कभी ना बोझ
जो बैठे सबको ले जाती
मंजिल पर उनको पहुंचाती
मेरा सफ़र सुहाना लगता
आना-जाना प्यारा लगता
मेरी यात्रा सुरक्षित होती
प्यार के मणियां मैं पिरोती
बच्चों को सुहाती हूँ मैं
जंगल शहर घुमाती हूँ मैं
समय बचत करती हूँ मैं
राज-कोश भरती हूँ मैं

व्यग्र पाण्डे

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