चाँद और सूरज

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चाँद और सूरज

By |2016-07-17T20:38:20+00:00June 14th, 2016|Categories: कविता, बाल मन|0 Comments

सूरज बोला चंदा से

कल से दिन में तुम ही आना

रात को मैं आ जाऊंगा

तारों से मिलना है मुझको ।

रोज़ रोज़ बस तुम मिलते हो

टिम टिम तारों से मिलना है

रात को मैं ही आऊंगा

दिन में तुम ही रहना ।

चाँद बेचारा अब क्या बोले

चुप चाप बैठा सोचे

अब इस सूरज को कौन समझाये

दिन को सूरज ही सजाये ।

लेखक / लेखिका : कल्पना भट्ट

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