इश्क की राह

इश्क की राह में सबसे बडा नासूर यही है,

जिन्दगी जहर सी जीने का दस्तूर यही है|

दर्द खामोशियों में सहो इस कदर,

ये सजा है मोहब्बत में सुरूर यही है||

 

फैसला जो भी करना संभल करो,

जिसपे जीते हो हर पल उसी पे मरो,

रोज टालोगे गर तुम पहर दो पहर,

जख्म पाने का मौसम जरूर यही है||

 

राज-ए- दिल में छुपा कर रखो गैर से,

खुद को बहुत दूर रखो अंजाम-ए- बैर से,

चैन से जीने की वजह गर चुनो,

दिल की खामोशियों का “राज” रहकर मशहूर यही है||

 

लेखक / लेखिका : पुष्पराज यादव

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