सोचो –जागो

प्यार प्यार ही कविता है तो जीवन का कोईमूल्य नहीं.
जवानी में नहीं तोप्यार की बातें बुढापे में कैसे?
ठीक है भाई, जवानी में केवल प्रेम की बातें ?
ज्ञान कीबातें भीसोचना है ,भाई !
आज के चित्र पट देखो–
कथानक तो एक, मसाला ज्यादा.
कथा नायक बदमाश, अनपढ़,
अमीरी लडकी मुलाक़ात. खल नायक का प्रवेश.
मंत्री का भ्रष्टाचार , पुलिस अधिकारी गैरकानूनी एक.
क़ानून रक्षक अधिकारी ,हत्या,उसके बेटे से बदला.
इसके सिवा और कुछ नहीं.
हम ज्ञान चक्षु प्राप्त मानव, हम पशु नहीं है.
संयम, नियंत्रण की बातेंभीसोचनी है.
युवा पीढी कमजोर. क्यों? अश्लीलता देख देख
सब कुछ पतन. कमजोरी. शादी-तलाक याअशांत जीवन.
शक-पर-पुरुष सम्बन्ध– ह्त्या–आत्म हत्या.
नफरत–शारब एक मंत्री–पत्नी मर गयी–खबरपढी तो
मंत्री उसकेचौथा पति.
मानसिक नियंत्रण, संयम,अनुशासन?!
राम पुरुषोत्तम ? पिता त्रिपत्नी–शिशु नहीं.
ज़रा सोचो– साहित्य समाज का दर्पण.
खबरें सामाजिक इतिहास.
अनुशासन के पतन में मानव पतन.
सोचो! जागो! आगे पढो!
आदर्श समाज बनाओ.

लेखक / लेखिका : से. अनंत कृष्णन (मतिनंत)

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