विक्रमशिला विश्वविद्यालय : उपेक्षा का शिकार क्यों?

प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण विश्वादालयों में विक्रमशिला विश्वादालाया का एक महत्वपूर्ण स्थान है।यह नालंदा,तेलह!रा,तक्षशिला विश्वादालयों की श्रेणी में है।प!ल वंश के शाशन काल में निर्मित इस विश्वविदलाय के बारे में जानकारी हुमे तिब्बत के ग्रन्थों के माध्यम से हुआ।आठवीं शताब्दी में निर्मित इस विश्वादालाय में सौ शिक्षक और हजारों छात्र आध्यन किया करते थे।नदी के समीप रहने तथा पह! से घिरे होने के कारण यह अहसास होता है की प्राचीन काल में यह स्थान कितना मनोरम रहा होगा।वर्तमान में खुदाई में इसके जो अवशेष प्रपट हुए हैं उससे ज्ञात होता है की उस काल में स्थापत्य काला कितनी विकसित थी।विशाल भवनो के अवशेष जिनमे जल संचरण और जल संग्रहण ,भवन की शीतलता के उपाय जैसे योजनाओं को देखकर येही लगता है की उस समय के अभियंता कितने मेघ!वी थे और उनका निर्माण प्रकृति से स!मंजस्य में था।प्राचीन चीनी यात्री फ़ाहयन ने भी अपने भ्रमण वृतांत में इस विश्वादालाय का वर्णन किया है।

इस विश्व विद्यालय को तेरहवी शताब्दी में बुरी तरह नुकसान बख्तियार खिलजी द्वारा पहुंचाया गया।नालंदा विश्वविद्यालय की तरह हीं इस विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया गया।

खुदाई में प्राप्त वस्तुओ को देखने से स्पस्ट दीख पड़ता है की उस काल में बुध और हिन्दू संस्कृतियाँ आपस में अत्यंत करीब आ गई थीं।बुध के साथ-साथ गणेश और शिव को पूजे जाने के प्रमाण मिलते हैं।
विक्रमशिला बिहार के भागलपुर में अवस्थित है।यह भागलपुर मुख्यलाय से पचास किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है।किन्तु यह! तक सुगमता से पहुचने के लिए न तो सड़क है और न हीं कोई अन्य व्यवस्था।सड़क इतने खराब स्थिति में है की पहुँचते-पहुँचते आदमी परेशान हो उठता है और आधे रास्ते से हीं लौटने की सोंचने लगता है।अगर जाम में फंस गए तो हालत और बुरी।इस मार्ग पर भारी वाहनो का सतत आवागमन होते रहता है जिससे रास्ते भर धूल,बालू उड़ते रहते हैं।कुल मिलकर यह पूरी तरह उपेक्षित है और ऐसा प्रतीत होता है की यह! पहुँचने के लिए हतोत्शाहित किया जा रहा हो।

अवश्यकता इस बात की है कि एक केंद्र सरकार के सहयोग से एक पृथक मार्ग विकसित किया जाये ।यह मार्ग सीधे विक्रमशिला की ओर अग्रसर हो।यदि संभव हो तो विदूत चालित झूला चलाने पर भी विचार किया जा सकता है।

अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो एक महान इतिहास काल के गर्भ में डूब जाएगा।यहा के युवाओं ने कहा कि इसके विकसित होने से बारे पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और इस क्षत्र का सर्वांगीण विकास होगा!!

लेखक / लेखिका : जय श्री

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