क्या लिखूं

क्या
कुछ लिखें
सब कुछ
लिख
चुका है
पहले से ही
हज़ारों साल के
लेख
अभी तक
पढे नहीं गये
समझ
में आते नहीं
लेकिन
लिखना तो
जारी है
लिखना ही
संसार का नियम
कुछ अंश मेरे काम का
कुछ अंश
उनके
काम का
लेकिन
आगे वो भी माहिर हैं
वो भी लिखेंगे
क्या लिखूं
बक्शी जी भी कहते थे
आज सोनी जी
कह रहे हैं .

लेखक / लेखिका : अनिल कुमार सोनी

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...
Voting is currently disabled, data maintenance in progress.

Leave a Reply