अनशन

भूखें रहकर हमने भी
संग किया संघर्ष तुम्हारे
लाठी के निशान देह पर
जनपथ पर पदचिह्न हमारे ।

काम करो अब नेताजी
अपनी गाथा मत गायो
कोष तुम्हारा भरा हुआ था
खाली खाता मत दिखलाओ ।

चुनने से पहले क्यों
इतने ज्यादा बोल गए थे
झुग्गी – झोपड़ियो को क्यों
महलो से तोल गए थे

ठुल्ले है, रिश्वत लेते हैं
चलो तुम्हारे मामा हो गए
माँग माँग कर जनता से
तुम तो चन्दा मामा (C.M) हो गए ।

पुरे भारत की गलियो से
आये थे आशाये लेकर
उनकी आशा मत तोड़ो
बहुत हुआ दुष्प्रचार तुम्हारा
बैठे थे जो थे संग तुम्हारे
उनका भी तो अनशन तोड़ो ।

लेखक / लेखिका : अवधेश तोमर

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