“जिंदगी का मोड़”

“मोड़ जिंदगी का”

जान
की बाजी
लगा कर
खेला था
खेल
हंसी  थी
जनता
ताली भी
बजी थी
कटोरे में पैसे मांगे
मुंह
फेर लिया  था
सबने
लोहे की राड
टेंटुए
में
अड़ा कर
मोड़ने में माहिर
की
कला भी दिखाई
पुनः कटोरा घुमाया
फिर वही हाल
इसी को
मोड़ कहते है
जिंदगी का ।

अनिल कुमार सोनी
पाटन

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu