“हिंदी की परख”

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“हिंदी की परख”

By |2016-07-23T23:36:57+00:00July 23rd, 2016|Categories: कविता|0 Comments

रोना हँसना
बोलना
आहट्
आवाज
कान में
घंटी सुनाई दे
कराहना
जोर से बोलो
या
फिर धीरे से पूछना
गुस्से में खड़ी बोली
अथवा
किन्नर के गाने
बरेदी की हल्कार
बेटी
की विदाई की
सिस्कन
डमरू का
नाद
वीणा की
झन्कार
शिव के ताण्डव
शहनाई की
गूंज
हिंदी है.

अनिल कुमार सोनी पत्रकार
पाटन जबलपुर

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