“चंदा “की चांदनी

“चंदा” की चांदनी

फिर अंधेरी रात

चार दिन की चांदनी

फिर अंधेरी रात

चार रात की चांदनी

फिर अंधेरी रात

न चांद की

न दिन की

न रात की

जनता का चांद

जनता की रात

जनता का दिन

सिर्फ

उनकी चांदनी उनकी.

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