मेरी पहली वैष्णो देवी यात्रा

कब से मन वैष्णो देवी जाने को करता था l एक तो घर के पास देवी का मंदिर था जिस कारण माता रानी में श्रद्धा बाकि भगवानो से ज्यादा थी l दूसरा पापा हिमाचल की तो सारी देवियों(चिंतपूर्णी,ज्वाला, चामुंडा,कांगड़ा) के दर्शन तो कई बार करा लाये थे, बचपन में एक बार नैना देवी भी हो आये थे तो केवल वैष्णो देवी ही शेष रह गई थी जिनके अब तक दर्शन करने का सोभाग्य प्राप्त नहीं हुआ थाl वैष्णो देवी है भी सब देवियों में बड़ी इसलिए वहा जाने के इच्छा दिल में जयादा हिलोरे लेती थी l
किन्तु पापा तो वैष्णो देवी जाने के नाम से झेंप जाते थे l जिसका कारण उनका व्वयसाय था वे अपनी दुकान एक दिन से ज्यादा बंद नहीं करते थे कमाएगे नहीं तो खायंगे कैसे lहम लोग पंजाब के निवासी है l पंजाब से जहाँ हम रहते है वहां से हिमाचल जाकर तो एक दिन में लौटा जा सकता था पर जम्मू जाने के लिए कम से कम 3 दिन तो चाहिए ही थे l दूसरा हिमाचल जाने का खर्चा भी कुछ कम था जम्मू का खर्चा भी अधिक था l इसलिए पापा कभी वैष्णो देवी नहीं लेकर गये l माँ भी कभी वैष्णो देवी नहीं गयी थी तो उनके दिल में भी जिंदगी में एक बार वह जाने की चाह थी l
एक दिन पापा को पता चला की उनकी जान पहचान का एक व्यक्ति (नवीन भैया ) कल रात की ट्रेन से वैष्णो देवी जाने वाला है lगर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थी,इन छुट्टियों में हम लोग कही जा भी नहीं रहे थे, तो पापा ने उनसे बोला मेरे परिवार को भी साथ ले चलो उन्हें भी दर्शन करा लाना l भैया ने भी हा कर दी।
पापा ने घर आकर मम्मी को बताया तो मम्मी ने कहा इतनी जल्दी रिजर्वेशन कैसे होगा l सीटें नहीं मिलेगी l पापा ने कहा उसकी चिंता तू मत कर lमैं कुछ इन्तेजाम करता हूँ l हमारी गली में खन्ना अंकल रहते है l जो रेलवे में अफसर रैंक पर है पिताजी उनके घर गये और उन्हें सारी बात बताई l उन्होंने ऑफिस फ़ोन करके पता किया की जम्मू जाने वाली ट्रेन की जानकारी निकाली l उन्होंने बताया हमारे शहर से तो सभी सीटें बुक है लेकिन पिछले स्टेशन से 5 सीटें ख़ाली है और मैंने वो सीटें बुक करवा दी है l अब हम लोगो ने पैकिंग शुरू कर दी l मेरी एक दोस्त भी मेरे साथ गई l मेरी रिश्तेदारी में एक भांजा जो छुट्टियाँ बिताने नानी घर आया हुआ था वो भी हमारे साथ चलने को तैयार हो गया l इस तरह अब हम 5 सीटों पर 5 की जगह 6 लोग हो गये l
जब शाम को मेरे पड़ोस में रहने वाली एक और दोस्त मेरे घर आई और उसे हमारे जाने का पता चला तो उसने भी कहा मैं और मेरा भाई भी चलेंगे l और इस तरह हम कुल 9 जन हो गये l हमारे पास केवल 5 सीटें थी l नवीन भैया वेटिंग में थे l 3 टिकेट हमने जनरल के लिए ओर 6 सीटों पर 9 जन ने एडजस्ट किआ l
रात साढ़े आठ बजे गाड़ी समय से चल पड़ी l हम सबने मिल के खाना वाना खाया थोड़ी देर मस्ती की कुछ सेल्फी ली l और फिर अपनी –अपनी सीट पर जाकर सो गये l सुबह दिन निकलने पर 5, 5:30 बजे के करीब पठानकोट में हम लोग अपनी सीटों से उतर आये l पहाड़ी नज़ारे शुरू हो चुके थे पर अभी बहुत दूर थे l 6 6:30 बजे के करीब हम लोग जम्मू पहुंच गये l जम्मू उतर कर हमने कतरा की बस ली l एक घंटे में कटरा आ गया l वह हमने एक होटल में एक कमरा लिया l वहा नहा धोकर , चाय नाश्ता कर के जरूरत का सामान साथ ले कर बाकि सब सामान वही रख कर l 10-11 बजे के करीब चढाई शुरू कर दी l चढाई शुरू करते ही सबसे पहले बाण गंगा आई l नवीन भैया वहा नहाये हम सब वहाँ नहीं नहाये , वहां कुछ स्नानघर बने हुए थे लोग वही नहा रहे थे वैसे एक छोटी सी नहर थी जिसमे इतना पानी नहीं था की नहाया जा सके l हम सब ने वह के नलों पर मुँह हाथ धोये और आगे चल पड़े कुछ ही आगे चलने पर T- series वालो का भंडारा चल रहा था l हम लोग वह पर नहीं रुके क्योंकि हम खा पीकर ही चले थे l थोड़ी आगे चलने पर घोड़ो वालो का स्टैंड आया l जहा वे लोग 1100/- में घोड़े पर बैठाकर भवन तक ले जाते है और वापिस लाते है l पर हम सब को तो पैदल ही जाना था l हम ने मम्मी से बोला आपको घोडा कर देते है पर उन्होंने कहा वे भी हमारे साथ पैदल ही चलेंगी l
यात्रा शुरू करने से पहले यात्रा पर्ची लेनी पड़ती है l तभी आपको भवन तक जाने दिया जाता है l आध –कुंवारी में भी गर्भ जून गुफ़ा के लिए नंबर लेना पड़ता है जाते हुए नंबर ले जाओ और आते हुए गर्भ जून गुफ़ा के दर्शन कर लो l हमने भी पंजीकरण करवाया और आगे बढ़ गये l चढाई करते हुए उपर भवन नजर आता है l एक तरफ ऊँचे ऊँचे पहाड़ दूसरी तरफ गहरी खाई l संकरा और उबड़ खाबड़ रास्ता और पीछे और आगे से दौड़ के आते हुए घोड़े l घोड़े और पैदल यात्रियों के लिए एक ही रास्ता था l वह के घोड़े और घोड़े वाले अफलातून होते है l घोड़े को चलाते रहते है यात्रियों को ही घोड़े को रास्ता देना पड़ता हैl घोड़े यात्रियों के लिए नहीं रुकते lवो तो दौड़ते जाते है l कुछ लोग पालकी में भी जा रहे थे l जिसे दो लोगो ने कंधो पर उठाया हुआ था l हम लोग भी जयकार लगाते,भजन गाते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे l वैष्णो देवी 12 मैंने भीड़ रहती है l छुट्टियों का समय था तो रोनक बहुत थी l 15 -20 मिनट चलने के बाद हम लोग भी रुक कर 5 मिनट का आराम करते और फिर चल पड़ते l कटरा से भवन तक यात्रियों के आराम के लिए रास्ते में थोड़ी थोड़ी दुरी पर शेड बनाये गये है और बेंच लगे हुए है l इन शेड्स का फायदा जितना यात्री उठाते है उतना ही बन्दर भी l वे रात को शेड के ही खम्बो के उपर सोते है l पूरे रस्ते खाने पीने का खूब इन्तेजाम है l ½- 1 मील की दुरी पर सरकारी भोजनालय की भी सुविधा है l जहा आम दामो पर अच्छा खाना मिल जाता है l चॉइस कम होती पर खानी स्वाद होता है l कुछ प्राइवेट रेस्टोरेंट और दुकाने भी आती है l थोड़ी थोड़ी दुरी पर शोचालय भी बनाये गये है l शोचलायो में सफाई थी l पानी और साबुन का भी बढिया इन्तेजाम था l
जम्मू कश्मीर सेंसिटिव इलाका होने के कारण वह मोबाइल फ़ोन काम नहीं करते l केवल पोस्ट पेड मोबाइल ही काम करते है l हमे ये बात पता नहीं थी और हम सभी के पास प्री पेड मोबाइल थे l तो संपर्क बनाये रखना मुश्किल था l मम्मी बहुत थक गयी थी l इसलिए वे धीरे धीरे चलने लगी l आगे जाने से मना करने लगी l दीदी की भी तबीयत बिगड़ रही थी lउसे लिम्का पिलाई गई l ओर दवाई दी l हम सब ने मिलकर उनकी हिम्मत बंधाई और धीरे धीरे आगे बढने लगे l फिर कुछ दुरी पर चेकिंग पोस्ट आई l हम सब के पास कोई न कोई सामान था तो हम सब लोगो को चेकिंग करवाने के लिए अंदर जाना पड़ा l वहाँ हमे थोडा समय लग गया l मम्मी के पास कोई सामान नहीं था इसलिए वे आगे निकल गई l हम लोग भी चेकिंग करवा कर आगे चल पड़े l जब अगला शेड आने तक भी मम्मी नहीं दिखाई दी तो हम सब घबरा गये l शाम के 5 बजे के करीब का समय हो गया था l दिन ढलने वाला था l मम्मी मिल नहीं रही थी l भाई ने बोला वो पीछे जा कर चेकिंग पोस्ट तक जाकर चेक करके आएगा l 15-20 मिनट बाद जब वो लोटा तो मम्मी उसके साथ नहीं थी l दीदी की तबियत बिगड़ रही थी l फिर उसने बोला वो आगे जाकर मम्मी को देख क्र आता है तब तक तुम यही इंतजार करो l 15-20 मिनट बाद वो फिर लौटा और बताया मम्मी अगले शेड में है l हम सबने ने तस्सली की साँस ली और जल्दी से मम्मी के पास पहुँच गये l मम्मी की तेज गति के लिए उन्हें बधाई दी l फिर कुछ ही देर में 6 बजे तक हम लोग आध कुंवारी पहुँच गये l
आध कुंवारी पहुँच कर हमने थोडा सा आराम किआ l नाश्ता पानी किया l गर्भ जून का नंबर लगवाया l आध कुंवारी से भवन तक जाने के अब दो रास्ते बन गये है l एक घोड़ो के लिए पत्थर वाला कच्चा रास्ता जो पुराना था और एक ऑटो के लिए पक्का रास्ता जो अभी अभी बना था l अभी ही वैष्णो देवी आध कुंवारी से भवन के लिए ऑटो चले थे l जो केवल बुजर्गो, अपाहिजों,रोगग्रस्त और बच्चो को ही ले जाते थे l भाई भी माँ के लिए ऑटो का टिकेट लेने गया पर लाइन बहुत लम्बी थी और उसमे काफी समय लग जाता इसलिए हम लोगो ने पैदल चलना ही उचित समझा और मम्मी की आज्ञा लेकर पैदल ही आगे की यात्रा आरम्भ की l अब दीदी की तबियत में भी सुधार था l 3 घंटे के करीब हम लोग भवन तक पहुँच गये l
भवन के पास नहाने धोने का प्रबंध था l नवीन भैया , दीदी और मेरी एक दोस्त नहा कर आये l बाकि हम पांच लोग नहीं नहाये क्योकी रात को बहुत ठण्ड हो गई थी और पानी भी बहुत ठंडा था l हम लोगो ने सिर्फ पानी के छींटे मार कर ही अपने आप को पवित्र कर लिया l
फिर हम सब लोग दर्शन करने के लिए लाइन में लग गये l जयकारे लगाते हुए घंटे के बाद रात के करीब 11 बजे हम लोग भवन में पहुँच गये l आराम से माता रानी के दर्शन किये l फिर हम पास ही में बने शिवालय में गये जहाँ भी माता का मंदिर (शक्तिपीठ) होता है , वह पास में ही एक शिवालय भी जरुर होता है l माता के दर्शन के बाद शिव के दर्शन जरुर करने चाहिए ऐसा मैंने किसी यात्रा सीरियल में सुना था l l शिव परिवार को जल अर्पण करके उन्हें प्रणाम किया lवापिस आने पर ठण्ड बहुत बढ़ गई थी lवैष्णो देवी में भवन पर और आध- कुँवारी में 100/- प्रति कम्बल सिक्यूरिटी देकर कम्बल मिल जाते है l हम सब ने भी दो –दो कम्बल लिए और आकर जिसे जहा जगह मिली वही पसर गया l 3-4 घंटे आराम करने के बाद सूरज की पहली किरण के साथ हम उठ गए l फिर कम्बल जमा करवाए और अपना सामान उठा कर भेरो बाबा की चढाई शुरू कर दी l मम्मी को घोडा कर दिया गया l भेरो बाबा की चढाई सीधी और कठिन होती है l रास्ता और भी संकरा हो जाता है l रास्ते में खाने पीने और शोच का भी कोई प्रबंध नहीं होता l शेड और बेंच भी नहीं है उस रास्ते पर l कहते है भेरो बाबा के दर्शन किये बिना वैष्णो देवी की यात्रा पूर्ण नहीं होती l एक डेढ़ घंटे में हम लोग भेरो मंदिर पहुँच गये l हम सब ने भेरो बाबा का प्रणाम कर उनकी विभूति से तिलक किया और वापिस की राह ली l
उतराई चढाई से आसान होती है l सुबह के 7 बजे के करीब हमने वापिस लौटना शुरू कर दिया l मम्मी घोड़े पर थी l हम सब मस्ती करते हुए पैदल आ रहे थे l दीदी की तबियत ठीक नहीं थी l और उन्हें घोड़े पे बैठने से डर लग रहा था l वे बहुत कहने पर भी घोड़े पर बैठने को तैयार नहीं हुई l किसी तरह उन्हें हिम्मत बंधा कर खिंचा जा रहा था l2 घंटे के आस पास हम लोग सांझी छत पर पहुँच गये l वह पर हेलिपैड बना हुआ है हेलीकाप्टर से यात्रा करने वाले लोग वही उतरते है l हलिकोप्टर की ऑनलाइन बुकिंग होती है उस वक़्त हेलीकाप्टर का आने जाने का किराया 700/- था l (हेलीकाप्टर शायद कटरा से चलते है मुझे पक्का नहीं पता l सांझी छत से भवन 2 या 3 कम की ही दुरी पर है l) ऑटो वाले रस्ते में सांझी छत नहीं आती l यहाँ माता रानी की चरण पादुका बनी हुई है l 12 बजे के करीब हम लोग आध कुंवारी में थे l अभी गर्भ जून गुफ़ा में हमारा नंबर आने में काफी वक़्त था तो हमने सोचा तब तक आराम कर लिया जाये और हम लोगो को जहा जगह मिली पसर गये l तभी हम से किसी को (पता नहीं किसे )कुछ लोग मिले थे जो बिना गर्भ जून गुफ़ा के दर्शन किये क्योंकि यदि वे लोग ओर रुकते तो समय से अपनी ट्रेन नहीं पकड़ पाते और वे अपने गर्भ जून की टिकट्स उसे पकड़ा गये l उनका नंबर बस आधे घंटे में आने ही वाला था l हम लोग उठे और उनकी जगह गर्भ जून के दर्शन कर आये l
गर्भ जून गुफ़ा या गर्भ गृह बहुत भींचा (संकरा) होता है अंदर जाने पर एक बार तो दम घुटने लगा आगे भी लोग पीछे भी लोग सब धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे बाहर भी नहीं निकल सकती थी ऐसा लगा अब तो बस प्राण गये लेकिन जल्द ही गुफ़ा के बाहर आ गई lगुफ़ा में वो स्थान भी आया जहा माता ने बैठ कर तपस्या की थी l
गर्भ गृह में शक्ति ने 9 महीने तक तपस्या की थी इसी कारण संतान अपनी माँ के गर्भ में 9 महीने तक रहती है l गर्भगृह गुफ़ा को इसलिए गर्भगृह कहा जाता है क्योंकि ये गर्भ की तरह ही छोटी और संकरी होती हैl हम लोग कुछ देर आध कुंवारी घुमे आराम किया फोटोज ली l तभी भाई को वह एक बुजुर्ग महिला मिली जो अपने परिवार से बिछड गई थी l भाई उस महिला को जानते थे वह हमारे शहर के पास के ही गांव की महिला थी और भाई का आस पास के गांवो में रोज का जाना था l वह उस महिला को लेकर एननाउंसमेंट वाले कमरे में ले गया और उनकी एननाउंसमेंट करवाई महिला को उसके परिवार को सौंप कर 2-3 बजे के करीब हम लोगो में आगे का सफ़र शुरू कर दिया l
अब मम्मी भी पैदल थी l पर अब उनके पैरो में आराम था l दीदी की तबियत में भी काफी सुधार था l धीरे धीरे 5 बजे तक हम लोग वापिस कटरा पहुँच गए l वह पहुंचते ही हमने गोल गप्पे खाए l ये भी यात्रा पूर्ण करने का एक नियम है ऐसा मेरी दोस्त ने बताया था l उसके कहने पर हम सब ने गोल गप्पे खा लिए l फिर वापिस होटल आकर हमने खाना – वाना खाया अपना सामान उठाया और निकल पडे l रात के करीब 8 बजे हम जम्मू के स्टेशन पर पहुँच गये l वापसी की हमने बुकिंग नहीं करवाई थी l हमारी ट्रेन के चलने में अभी 7-8 घंटे का समय था और हमने स्टेशन पर ही इंतज़ार करना उचित समझा l तभी हमे पता चला गोवहाटी जाने वाली गाड़ी 15-20 मिनट में जाने वाली है जो वाया पंजाब होकर जाएगी l नवीन भैया ने कहा हम लोग इसी ट्रेन से चलते है रात भर स्टेशन पर क्या करेंगे l भाई सब को लेकर ट्रेन में चला गया नवीन भैया टिकट्स लेने चले गये l हम लोग ट्रेन में चढ गये और कुछ ही देर में ट्रेन चल पड़ी l जब टी टी में हम से टिकेट माँगा तो हमने उसे बताया हमारे पास जनरल की टिकट्स है जो नवीन भिया के पास है और शायद वो पिछले वाले कम्पार्टमेंट में है l जब ट्रेन रुकेगी तो हम लोग जनरल डिब्बे में चले जायेंगे l और आपको टिकट्स दिखा देंगे वह हमारी बात मान गयाl l भाई ने टी टी को कुछ पैसे दिए और 8 सीट्स का अरेंजमेंट करने को कहा l टी टी सारे पैसे तो रख लिए पर हमे दो ही सीटस दीl हम लोगो ने जैसे तैसे 2 सीट्स पर एडजस्ट किया और एक दूसरे के कंधो पर सिर रख कर सो गये l ट्रेन जम्मू से सीधे 6 बजे के करीब जालंधर छावनी में रुकी lभैया का फ़ोन मिल नहीं रहा था l हम लोग जालंधर उतर गये l यहाँ से हमारे शहर के लिए कोई ट्रेन नहीं थी इसलिए हम वापिस गाड़ी में चढ़ गये जिसने आगे लुधियाना होकर जाना था l हम लोग लुधियाना उतर गये l टी टी भी वह पर बदल गया था l हमने सुख की साँस ली l भाई दौडकर टिकट्स ले आया 8 बजे गाड़ी आई और हम लोग अपने घर के लिए रवान हो गयेl जब गाड़ी अगले स्टेशन पर रुकी तो भाई की जेब में टिकट्स नहीं थे वो उसी स्टेशन पर उतर कर और 8 टिकट्स ले आया और कुछ ही देर में हम लोग अपने घर थे l घर पहुँच कर हमने फिर से भैया को फ़ोन मिलाया इस बार फ़ोन मिल गया उन्होंने बताया जैसे उन्होंने टिकट्स लिए गाड़ी चल पड़ी थी और वो गाड़ी पकड़ नहीं पाए अब वो सुबह वाली गाड़ी से चले है जो अभी अभी पठानकोट पहुंची है l नहा धोकर मम्मी ने कड़ाई भी तैयार कर दी मै गली से छोटी छोटी कंजक बुला लाई और इस तरह हमने अपनी वैष्णो देवी यात्रा पूर्ण की l

एकता रानी

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