इतना भी परेशान ना हो

ज़िंदगी के लिये

कि जीने के लुत्फ भी ना

उठाए जाये|

ज़रूरतो को इतना भी बुलंद ना कर

 कि तेरे साये भी ना नज़र आये|

जीना है तो शौक से जी

पर ज़िंदगी के मायने तो नज़र आये|

सांस से सांस ख़त्म हो रही है…..

धुआं बनके हवा में खो रही है-

एक रोज़ तो निकाल

खुद से मुलाकात के लिए,

 

एक रोज़ तो निकल दिल से दिल के बात के लिए.

     – पूनम के कलम से

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