अन्वय

Home » अन्वय

अन्वय

By |2016-09-19T09:15:41+00:00July 26th, 2016|Categories: व्याकरण|0 Comments

अन्वय 

कर्ता और क्रिया का मेल : – 

  1. यदि कर्तृवाच्य वाक्य में कर्त्ता विभक्त्तिरहित है, तो उसकी क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्त्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार होंगे। जैसे – करीम किताब पढता है। सोहन मिठाई खता है। रीता घर जाती है।
  2. यदि वाक्य में एक ही लिंग , वचन और पुरुष के अनेक विभक्त्तिरहित कर्त्ता हों और अंतिम कर्त्ता के पहले और संयोजक आया हो, तो इन कर्त्ताओं की क्रिया  उसी लिंग के बहुवचन में होगी। जैसे – मोहन और सोहन सोते हैं। आशा, उषा और पूर्णिमा स्कूल जाती हैं।
  3. यदि वाक्य में दो भिन्न लिंगों के कर्त्ता हों और दोनों दवंदसमास के अनुसार प्रयुक्त हों,  तो उनकी क्रिया पुलिंग बहुवचन में होगी जैसे – नर- नारी गए। राजा – रानी आये। स्त्री – पुरुष मिले । माता- पिता बैठे हैं।
  4. यदि वाक्य में दो भिन्न विभक्तिरहित एकवचन कर्त्ता हों और दोनों के बीच और संयोजक आये, तो उनकी क्रिया पुलिंग और बहुवचन में होगी राधा और कृषण रास रचते हैं। बाघ और बकरी एक घाट पानी पिटे हैं।
  5. यदि वाक्य में दोनों लिंगो और वचनों के अनेक  कर्त्ता हों, तो क्रिया बहुवचन में होगी और उनका लिंग अंतिम कर्त्ता के अनुसार होगा जैसे – एक लड़का , दो भूढे और अनेक लड़कियां जाती हैं। एक बकरी, दो गायें और बहुत- से बैल मैदान में चरते हैं।
  6. यदि वाक्य में अनेक कर्त्ताओं के बीच विभाजक समुच्चयबोधक अव्यय या अथवा व रहे , क्रिया अंतिम कर्त्ता के लिंग और वचन के अनुसार होगी। जैसे – घनश्याम की पांच दरिया व एक कंबल बिकेगा। हरी का एक कंबल या पांच दरिया बिकेंगी। मोहन का बैल या सोहन की गायें बिकेंगी।
  7. यदि उत्तमपुरुष, मध्यपुरुष और अन्यपुरुष एक वाक्य में कर्त्ता बनकर आएं तो क्रिया उत्तमपुरुष के अनुसार होगी। जैसे – वह और हम जायेंगे। हरी, तुम और हम सिनेमा देखने चलेंगे। वह, आप और मैं चलूँगा।

कर्म और क्रिया का मेल

  1. यदि वाक्य में कर्त्ता ने विभक्ति से युक्त हो और कर्म की ‘को’ विभक्ति न हो, तो उसकी क्रिया कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार होगी। जैसे – आशा ने पुस्तक पढ़ी। हमने लड़ाई जीती। उसने गाली दी। मैंने रूपये दिए। तुमने क्षमा मांगी।
  2. यदि कर्त्ता और कर्म दोनों विभक्तिचिन्हों से युक्त हो, तो क्रिया सदा एकवचन पुलिंग और अन्यपुरुष  में होगी । जैसे – मैंने कृषण को बुलाया। तुमने उसे देखा। स्त्रियों  ने पुरुषों को ध्यान से देखा ।
  3. यदि कर्त्ता को प्रत्यय से युक्त हो और कर्म के स्थान पर कोई क्रियार्थक संज्ञा आये तो क्रिया सदा पुलिंग , एकवचन और अन्यपुरुष में होगी। जैसे – तुम्हे पुस्तक पढ़ना नहीं  आता। अलका को रसोई बनाना नहीं आता। उसे समझकर बात करना नहीं आता।
  4. यदि एक ही लिंग- वचन के अनेक प्राणनिवाचक विभक्तिरहित कर्म एक साथ आएं, तो क्रिया उसी लिंग में बहुवचन होगी। जैसे – श्याम ने बैल और घोड़ा मोल लिए। तुमने गाय और भैंस मोल ली।
  5. यदि एक ही लिंग- वचन के अनेक प्राणनिवाचक – अप्राणनिवाचक अप्रत्यय कर्म एक साथ एकवचन में आये, तो क्रिया भी एकवचन में होगी। जैसे – मैंने एक गाये और एक भैंस खरीदी। सोहन ने एक पुस्तक और एक कलम खरीदी। मोहन ने एक घोड़ा और एक हाथी बेचा।
  6. यदि वाक्य में भिन्न -भिन्न लिंग के अनेक प्रत्यय कर्म आएं और वे और से जुड़े हों, तो क्रिया अंतिम कर्म के लिंग और वचन में होगी।

संज्ञा और सर्वनाम का मेल

  1. वाक्य में लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार सवर्नाम उस संज्ञा का अनुसरण करता है। जिसके बदले उसका प्रयोग होता है। जैसे – लड़के वे ही हैं। लड़कियां भी ये ही हैं।
  2. यदि वाक्य में अनेक संज्ञाओं के स्थान पर ही सर्वनाम आये , तो वह पुलिंग बहुवचन में होगा। जैसे – रमेश और सुरेश पटना गए हैं, दो दिन बाद वे लौटेंगे। सुरेश, शीला और रमा आये और वे चले भी गए।

वाक्यगत प्रयोग

वाक्य का सारा  सौंदर्य पदों अथवा शब्दों के समुचित प्रयोग पर आश्रित है। पदों के स्वरूप और अौचित्य पर ध्यान रखे बिना शिशस्त और सुन्दर वाक्यों की रचना नहीं होती। प्रयोग – सम्बन्धी कुछ आवश्यक निर्देश निम्नलिखित हैं।

  1. एक वाक्य से एक ही भाव प्रकट हो।
  2. शब्दों का प्रयोग करते समय व्याकरण- सम्बन्धी नियमों का पालन हो।
  3. वाक्य रचना में अधूरे वाक्यों को नहीं रखा जाये।
  4. वाक्य – योजना में स्पष्टता और प्रयुक्त शब्दों में शैली – सम्बन्धी शिष्ट्ता हो।
  5. वाक्य में शब्दों का परस्पर घनिष्ट सम्बन्ध हो। तात्पर्य यह है की वाक्य में सभी शब्दों का प्रयोग एक ही काल में, एक ही स्थान में और एक ही साथ होना चहिये।
  6. वाक्य में ध्वनि और अर्थ की संगति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  7. वाक्य में व्यर्थ शब्द न आने पाएं।
  8. वाक्य – योजना में आवश्यकतानुसार जहाँ- तहाँ मुहावरों और कहावतों का भी प्रयोग हो।
  9. वाक्य में एक ही व्यक्ति या वस्तु के लिए कहीं ‘यह’ और ‘वह’ , कहीं आप और कहीं ‘तुम’, कहीं ‘इसे’ और कहीं ‘इन्हे’, कहीं ‘उसे’ और कहीं ‘उन्हें’, कहीं  ‘उसका’ और कहीं ‘उनका’ कहीं ‘इनका’ और कहीं ‘इसका’ प्रयोग नहीं  होना चाहिए।
  10. वाक्य में पुनरुक्तिदोष नहीं होना चाहिए। शब्दों के प्रयोग में अौचित्य पर ध्यान देना चाहिए।
  11. वाक्य में अप्रचलित शब्दों का व्यवहार नहीं होना चाहिए।
  12. परोक्ष कथन हिंदी भाषा की प्रवृति के अनुकूल नहीं है। यह वाक्य अशुद्ध है- उसने कहा की उसे आपत्ति नहीं है। इसमें  ‘उसे’ के स्थान पर ‘मुझे’ होना चाहिए।

अन्य ध्यातव्य बातें

  1. प्रत्येक’, ‘किसी’, ‘कोईका प्रयोगये सदा एकवचन में प्रतुक्त होते हैं, बहुवचन में प्रयोग अशुद्ध है।

जैसे-  प्रत्येक – प्रत्येक व्यक्ति जीना चाहता है। प्रत्येक पुरुष से मेरा निवेदन है।  कोई – मैंने अब तक कोई काम नहीं किया। कोई ऐसा भी कह सकता है |  किसी- किसी व्यक्ति का वश नहीं चलता। किसी-किसी का ऐसा कहना है। किसी ने कहा था।

टिप्पणी – ‘कोई’ और ‘किसी’ के साथ ‘भी’ का प्रयोग अशुद्ध है। जैसे – कोई भी होगा, तब काम चल जायेगा। यहाँ ‘भी’ अनावश्यक है। ‘कोई’ और ‘किसी’ में ‘भी’  का भाव वर्त्तमान है।

  • दवाराका प्रयोगकिसी व्यक्ति के माध्यम से जब कोई काम होता है, तब संज्ञा के बाददवाराका प्रयोग होताहै;वस्तु (संज्ञाके बादसेलगताहै।

जैसे- सुरेश दवारा यह कार्य संपन्न हुआ। युद्ध से देश पर संकट छटा है।

  • सबऔरलोगका प्रयोगसामान्यतः दोनों बहुवचन हैं। पर कभीकभीसबसमुच्चयरूप में एकवचन में भीप्रयोग होता है।

जैसे- तुम्हारा सब काम गलत होता है।

  • यदि काम की अधिकता का बोध हो तोसबका प्रयोग बहुवचन में होगा।

जैसे- सब यही कहते हैं।  हिंदी में ‘सब’ समुच्चय और संख्या – दोनों का बोध कराता है।’

  • लोगसदा बहुवचन में प्रयुक्तहोता है।

जैसे- लोग अंधे नहीं हैं। लोग ठीक ही कहते हैं ।

कभीकभी  ‘सब लोगका प्रयोग बहुवचन में होता है।लोगकहने से कुछ व्यक्तियों का और  ‘सब लोगकहने सेअनगिनत और अधिक व्यक्तियोंका बोध होता है।

जैसे- सब लोगों का ऐसा विचार है। सब लोग कहते हैं की गांधी महापुरुष थे।

  • व्यक्ति वाचक संज्ञा और क्रिया का मेलयदि व्यक्तिवाचक संज्ञा कर्त्ता है, तो उसके लिंग और वचन के अनुसारक्रिया के लिंग और वचन होंगे।

जैसे – काशी सदा भारतीय संस्कृति का केंद्र रही है। यहाँ कर्त्ता स्त्रीलिंग है।  पहले कलकत्ता भारत की राजधानी था। यहाँ कर्त्ता पुलिंग है। उसका ज्ञान ही उसकी पूंजी था। यहाँ कर्त्ता पुलिंग है।

  • समयसूचक समुच्चय का प्रयोग – “तीन बजे हैं। आठ बजे हैं।इन वाक्यों में तीन और आठ बजने का बोध समुच्चयमें हुआ है।
  • परऔरऊपरका प्रयोग – ‘ ऊपर औरपरव्यक्ति और वस्तु दोनों के साथ प्रयुक्त होते हैं। किन्तुपैरसामान्यऊंचाई का औरऊपर’  विशेषऊंचाई का बोधक है।

जैसे-  पहाड़ के ऊपर एक मंदिर है।  इस विभाग में मैं सबसे ऊपर हूँ।

  • हिंदी मेंऊपरकीअपेक्षापरका व्यवहार अधिक होता है।

जैसे – मुझपर कृपा करो । छत पर लोग बैठे हैं।  गोप पर अभियोग है।  मुझपर तुम्हारे एहसान हैं।

  • बादऔरपीछेका प्रयोग  – यदि काल का अंतर बताना हो, तो ‘बाद’ का और यदि स्थान का अंतर सूचित करना हो, तो ‘पीछे’ का प्रयोग होता है।

जैसे –  उसके बाद वह आया- काल का अंतर।   मेरे बाद इसका नम्बर आया- काल का अंतर ।  उसका घर पीछे छूट गया – स्थान का अंतर। गाडी पीछे रह गयी  – स्थान का अंतर।  मैं उससे बहुत पीछे हूँ – स्थान का अंतर।

  • नए, नये, नई, नयी का शुद्ध प्रयोग– जिस शब्द का अंतिम वर्ण ‘या’ है उसका बहुवचन ‘ये’ होगा। ‘नया’ मूल शब्द है  , इसका बहुवचन ‘नए’ और स्त्रीलिंग  ‘नयी’ होगा।
  • गए, गई, गये, गयी का शुद्ध प्रयोग– मूल शब्द  ‘गया’ है। उपरिलिखित नियम के अनुसार ‘गया’ का बहुवचन ‘गये’ और स्त्रीलिंग ‘गयी ‘ होगा।
  • हुये,हुए,हुयी,हुई का शुद्ध प्रयोग– मुल शब्द ‘हुआ’ है । एकवचन में इसका बहुवचन होगा ‘हुए’; हुये नही । ‘हुए’ का स्त्रीलिंग ‘हुई’ होगा ; हुयी नही ।
Say something
Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment

हिन्दी लेखक डॉट कॉम

सोशल मीडिया से जुड़ें ... 
close-link