हाथी दादा ओढ़ लबादा,पहुँच गए बाज़ार ।

जूतों की दुकान देखकर माँगे जूते चार।

भालू जूतेवाला बोला, बड़ा तुम्हारा नाप,

इतने बड़े न बनते जूते, दादा कर दो माफ।

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