जीवन यात्रा

एक रोज
एक राह चलते किसी फकीर से
मैंने यूँ ही जीवन, जीवन की राह

और मोक्ष की चाह के बारे में पूछ लिया

मैंने सोचा कि
इतने सारे सवाल का
जो उससे जवाब नहीं पाऊँगा
मैं उसकी नादानी पर उसे
ज्ञान की अच्छी बूटी पिलाऊँगा

और जो अगर इससे
अपने सवालों का जवाब पाऊँगा
तो अपने बाकी का टाइम
इसी से बहस करके मैं बिताऊँगा

लेकिन, उसने
मेरे इन सारे सवालों का जो जवाब दिया
क्या कहूँ अजी वह मुझे लाजवाब किया

उसने बताया

जीवन वह है जिसमें

दूसरों के हित के लिए जीते रहने की चाह है
और दूसरों के जीवन को
जो आसान बनाते रहे वही जीवन की राह है

जीवन के इस पथ पर
आप चल कर जीवन यात्रा को तय करते रहें
मोक्ष की चाह के बिना
समस्त जीवों में, खुद को आप मय करते रहें

बस इतना करते रहने से
आपको, वह मोक्ष मिल जाएगा
आप उदाहरण बन जाएँगे
अपका मन-कुसुम खिल जाएगा

अपने सवाल का ऐसा
जवाब सुनके मैं तो लाजवाब हो गया
अब से जगहित करना
जगहितार्थ जीना…मेरा ख्वाब हो गया

आज से सावन

मैं इसी जीवन यात्रा पर चल पड़ता हूँ
तू देख कि कैसे
मैं जगहितार्थ जग के शत्रु से लड़ता हूँ

सावन कुमार

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu